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Thursday, 27 August 2015

कहीं आप ‘चिपकू’ गर्लफ्रेंड तो नहीं


किसी को प्यार करना और हर पल उसके साथ रहना... यही तो होती है हर प्यार करने वाले की चाहत। लेकिन, करीबी इतनी भी न हो कि सामने वाले का दम घुटने लगे।

बेशक, आप अपने बॉयफ्रेंड से बहुत प्यार करती हैं। अपनी जिंदगी के हर लम्हा आप उनके साथ बिताना चाहती हैं, लेकिन रिश्तों में इतनी जगह हमेशा रहनी चाहिए कि वो सांस ले सके। तो बेहतर यही है कि आप ‘चिपकू’ न बनें और उनकी स्वतंत्रता का भी सम्मान करें।

कौन हैं चिपकू गर्लफ्रेंड
आप उन पर निगाह रखती हैं। आप चाहती हैं कि उनकी हर हरकत, हर आदत और उनसे जुड़ी हर बात आपको पता हो। लेकिन, कई बार आपकी यह ख्वाहिश कब निजता की सीमा लांघ जाती है, पता ही नहीं चलता। नतीजतन, आपका व्यवहार, भले ही वह प्यार क्यों न हो, ‘चिपकूपन’ लगने लगता है। याद रखिए ज्यादा मीठा भी जहर हो जाता है। प्यार का अहसास कराने के और भी रास्ते हैं, जरा उनके बारे में भी सोचकर देखिए।
‘चिपकू’ गर्लफ्रेंड का यह कतई मतलब नहीं है कि आप बुरी गर्लफ्रेंड हैं। आपसी रिश्ते में जब प्यार और समझ का अभाव आता है, चाहे इसके पीछे कारण कुछ भी रहे हों, उनमें कहीं न कहीं असुरक्षा की भावना घर करने लगती है। उन्हें अपने साथी को खोने या उससे दूर होने का डर लगने लगता है। वे किसी भी कीमत पर उसे खोना नहीं चाहते, लिहाजा वे आपने साथी का प्यार व ध्यान आकर्षित करने के लिए ये रास्ता अपनाते हैं।

‘चिपकू’ गर्लफ्रेंड के लक्षणों को जानें

नीचे दिए गए चिपकू गर्लफ्रेंड के लक्षणों को जानें

रिश्तों में जरूरी है स्पेस
यह ‘चिपकू’ गर्लफ्रेंड का सबसे बड़ा लक्षण है जिसकी वजह से बॉयफ्रेंड उससे दूर भागता हैं। क्या आप अपने बॉययफ्रेंड को उसके चीजों के लिए पर्याप्त समय देती हैं? लड़कों को अपनी आजादी या कहें निजता बहुत प्यारी होती हैं, उन्हें अपने लिए समय की जरूरत होती हैं।

घंटो बात करने की चाहत
हो सकता है कि आपको हर रात बेड पर आराम से लेटकर उनसे घंटो फोन पर बात करना अच्छा लगता हो और आपका बॉयफ्रेंड भी रिश्ते की शुरुआत में इसे पसंद करता था, लेकिन बाद में इसमें कमी आ गई। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब वो आपको प्यार नहीं करते हैं। जब आपका बॉयफ्रेंड यह संकेत दे रहा है कि वो फोन पर कम बात करना चाहता है तो उस पर बात करने के लिए जोर डालने की जगह कुछ दिनों तक आप भी उसे कम फोन करें। इससे वे आपको और आपके फोन को मिस करेंगे।

बॉयफ्रेंड पर निर्भर
अपने दोस्तो के साथ बाहर जाएं। बाहर घूमने व मस्ती करने के लिए हमेशा बॉयफ्रेंड का इंतजार ना करें। अगर आप ‘चिपकू’ गर्लफ्रेंड का तमगा हटाना चाहती हैं तो खुद की इज्जत करें और उनके फोन व इशारों पर निर्भर ना रहें। अपने बॉयफ्रेंड को अपनी लाइफ का हिस्सा बनाएं, ना कि उन्हें अपनी जिंदगी समझें।

दोस्तों से मिलने पर रोक
अक्सर लड़कियों को यह शिकायत होती है कि लड़के अपने दोस्तों को ज्यादा तरजीह देते हैं। लेकिन, आपको यह समझने की जरूरत है कि दोस्तो भी उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है। अगर आप बार-बार उन्हें दोस्तों से दूर होने को कहने लगेंगी तो इसका असर आपके रिश्ते पर भी पड़ेगा। हां, हो सकता है कि आपके बॉयफ्रेंड के कुछ ऐसे दोस्त हों जो बुरी प्रवृति के हों लेकिन आप उनसे मिलने पर गुस्सा करने की जगह बॉयफ्रेंड को अपनी गलतियों से सीखने में मदद करें। उन्हें समझाने की कोशिश करें उन दोस्तों की संगति में रहकर वे भी ऐसे ही हो जाएंगे।

मदद की उम्मीद
हमेशा लड़को से मदद की उम्मीद रखना गलत है। उन्हें भी कभी मदद की जरूरत हो सकती है ऐसे में अगर आप अपने बॉयफ्रेंड को सुरक्षात्मक एहसास दिलाती हैं तो यह आपके रिश्ते के लिए अच्छा होगा। लड़कों को यह चीज काफी पसंद आती है। उनसे मदद के बारे में पूछने पर उन्हें अच्छा लगता है लेकिन ध्यान रहें बार-बार पूछना उन्हें नाराज भी कर सकता है। तो इस मामले में सही संतुलन होना जरूरी है। मदद के लिए सही तरीके से पूछें इससे वो आपको और प्यार करेंगे।

असुरक्षा की भावना
क्या आप असुरक्षित महसूस करती हैं जब आपका बॉयफ्रेंड किसी लड़की से मिलता है? क्या आपको डर लगता है कि वो उसके लिए आपको छोड़ देगा? आपका ऐसा सोचना गलत है क्योंकि आपने कभी अपने ब्वॉयफ्रेंड के अलावा किसी और लड़के से बात नहीं की। अपने दोस्तों के साथ बाहर जाएं लोगों से मिले जुलें और अन्य लड़कों से बात करें। उसके बाद आपको पता चलेगा कि सिर्फ बात करने का मतलब यह नहीं है कि आपको उससे प्यार हो गया है। तभी आप अपने ब्वॉयफ्रेंड पर भरोसा कर पाएंगी।

शक करने की आदत
सिर्फ इसलिए कि वह देर रात तक अपनी दोस्त के साथ बाहर है या काम कर रहा है इसका मतलब यह नहीं है कि उनके बीच कुछ चल रहा है। क्या आपको सच में ऐसा लगता है कि आप अपने बॉयफ्रेंड को अफेयर करने से रोक पाएंगी अगर वो सच में ऐसा करना चाहता है। एक पुरुष व महिला तभी अफेयर होता है क्योंकि वे ऐसा चाहते हैं। आपका ब्वॉयफ्रेंड आपसे प्यार करता है लेकिन अगर आप बार-बार उस पर शक करेंगी तो वो आपसे दूर हो सकता है।

प्‍यार में पड़ने से पहले जरूर पूछें ये सवाल

कहते हैं इश्‍क में सोच का कोई काम नहीं। यहां दिल की बाजी दिल से खेली जाती है। लेकिन, इस बाजी को खेलने से पहले कुछ तैयारी करनी तो जरूरी है। बाद में पछताने से अच्‍छा है कि पहले ही कुछ बातें साफ कर ली जाएं। ताकि, आगे चलकर कोई दिक्‍कत न हो।

आप प्‍यार भरे एक रिश्‍ते की शुरुआत करना चाहते हैं। रोमांस के फूलों की महक से महकने लगा है आपका दिल। दिल खिंचा जा रहा है एक शख्‍स की ओर। लेकिन, जरा ठहरिये। क्‍या आप सही राह पर हैं। बहुत सोच समझकर चलना चाहिये इस राह पर। जरा सी चूक और उम्र भर का पछतावा। तो, इससे पहले कि आपका दिल प्‍यार के दरिया में गोते खाने लगे, चंद सवालों का जवाब तलाशना जरूरी है। यह जानना जरूरी है कि दिल जिसे चाहने लगा है, वह आपके लिए सही है भी या नहीं। वह आपके लिए बना है या आप ही तुले हैं उसे अपना बनाने में।

प्‍यार से पहले पूछें ये सवाल
ये सवाल-जवाब किसी इंटरव्‍यू सरीखे नहीं हैं। लेकिन, जिसकी तरफ आपका दिल आपको ले चला है, आपके लिए जरूरी है उसके बारे में जानना। आखिर पता तो चले कि जिसके हाथ में आप अपनी सबसे कीमती चीज सौंपने जा रहे हैं, आखिर वो इसके काबिल भी है या नहीं। चंद ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब आपकी राह आसान कर सकते हैं। और खत्‍म कर सकते हैं आपकी हर दुविधा को। आपको अंदाजा लग सकता है कि आप जिसके साथ अपना जीवन बिताने की सोच रहे हैं, क्‍या वो सही है।

तुम्‍हारे लिए इस रिश्ते के क्‍या मायने हैं
इस एक सवाल का जवाब तस्‍वीर का रुख काफी हद तक साफ कर देगा। आपको पता लग जाए कि इस रिश्‍ते के बारे में उसकी क्‍या क्‍या राय है। इस रिश्‍ते पर क्‍या नजरिया है उसका। कैसे देखता है वह इस रिश्‍ते को और आखिर उसकी नजर में इस रिश्‍ते का भविष्‍य क्‍या है। क्‍या, उसके दिल में इस रिश्‍ते को आखिर तक निभाने का विचार है। या बस उसके लिए यह रिश्‍ता मौजूदा पल ही है। इस सवाल को जानने के बाद आपको अंदाजा लग जाएगा कि आखिर आप इस रिश्‍ते को लेकर कितने गंभीर हैं और सामने वाले की नजर में रिश्‍ता क्‍या मायने रखता है। तो, महज इस एक सवाल के जवाब से आपको काफी मदद मिलेगी।

कैसा है जीवन तुम्‍हारे लिए
क्‍या वह शख्‍स पूरी तरह से नकारात्‍मक है। या फिर उसे उम्‍मीद की किरण नजर आती रहती है। कुछ भी हो, इस सवाल से आप जान सकते हैं कि जिंदगी के प्रति उसका क्‍या नजरिया क्‍या है। वह कैसे जिंदगी और उसकी मुश्किलों को देखता है। आपको अंदाजा लग सकता है कि जीवन के प्रति आखिर उसका रवैया आपसे मेल खाता है या नहीं। या फिर वह नजरिया आपके लिए मुफीद है या नहीं। क्‍या आपके बीच सहमति के बिंदु अधिक हैं या ज्‍यादातर बातों पर आपकी राय एक दूजे से मेल नहीं खाती।

तुम्‍हें क्‍या पसंद है
क्‍या तुम्‍हें किताबों की संगत पसंद है या संगीत के दीवाने हो। फिल्‍में देखना तुम्‍हारा शौक है या लिखकर बयां करते हो दिल की जुबां। खाना पकाना तुम्‍हें पसंद है या बातें करना तुम्‍हारा पसंदीदा टाइम पास। या फिर कुछ और है जिसे करके तुम्‍हें मिलती है खुशी। यह सवाल भले ही छोटा लगे, लेकिन इसमें बहुत गहराई है। पसंद किसी भी व्‍यक्तित्‍व के बारे में काफी कुछ बयां करती है। इससे आप उस शख्‍स के बारे में एक खाका खींच सकते हैं। इससे आपको अंदाजा लग सकता है कि आखिर वह व्‍यक्ति है किस प्रकार का। और अपने खाली वक्‍त में वह क्‍या करना पसंद करता है।

व्‍यक्ति नहीं व्‍यक्तित्‍व भी देखें
व्‍यक्तित्‍व निर्माण में परिवार का अहम रोल होता है। किसी व्‍यक्ति के परिवार के बारे में जानकर आप उसके बारे में कुछ तो अंदाजा लगा ही सकते हैं। आप उससे पूछ सकते हैं कि आखिर उसका बचपन कहां बीता। कहां वह बड़ा हुआ। आखिर कहां, तुमने पढ़ाई की। इन सबसे आपको किसी व्‍यक्ति के बारे में काफी अंदाजा लग सकता है। हालांकि, व्‍यक्तित्‍व निर्माण में और भी कई पहलु काम करते हैं, लेकिन फिर भी इस बात से कुछ तो अंदाजा लग ही सकता है...

इन सवालों की गलियों के अलावा बहुत कुछ ऐसा है, जिसे आपको जानना चाहिये। और इसके लिए जरूरी है कि आप दोनों में सार्थक संवाद हो। बातचीत किसी भी रिश्‍ते में सबसे जरूरी चीज होती है। छोटी-छोटी बातें, कई बार बड़ी-बड़ी मुश्किलें हल कर देती हैं। बातचीत करके ही आप किसी के दिल की बातें जान सकते हैं। बातें बंद दिलों के ताले खोल देती हैं तो बातें कीजिए और जानिए कि क्‍या आप वास्‍तव में सही राह पर हैं।

इस लेख से संबंधित किसी प्रकार के सवाल या सुझाव के लिए आप यहां पोस्‍ट/कमेंट कर सकते हैं।

बॉयफ्रेंड के दिल की बात जानने के 15 टिप्‍स

कहते हैं कि किसी लड़की के दिल में क्‍या चल रहा है यह जानना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन लड़कों की सोच के बारे में क्‍या खयाल है। लड़कियां भी अक्‍सर इस बात को लेकर दुविधा में रहती हैं कि आखिर उनके साथी की सोच क्‍या है। वो किस बात को लेकर परेशान है या फिर आज उसका दिल क्‍यों उदास है। तो, चलिए आपकी उलझन को सुलझाने में हम थोड़ी मदद किये देते हैं। पढि़ए ये टिप्‍स और जानिए कि आखिर आपका साथी क्‍या सोचता है।

लड़कियों के लिए लड़कों को समझने के लिए सिर्फ अनुभव की नही बल्कि उससे भी ज्‍यादा समझने की आवश्यकता हो सकती है। यहां तक कि लड़कियों को लगता हैं कि ज्‍यादा लड़कों के साथ डेंटिग, उनकी मदद करेगा लड़कों को बेहतर समझने के लिए लेकिन ऐसा नही है। वास्तव में किसी भी लड़के को जानने के लिए आपको उसके साथ चीजों को इंजॉय करना, बातचीत करना और चीजों को वैसे ही समझने की कोशिश करनी होगी जैसे कि वह सोचता हैं।

अपने बॉयफ्रेंड के मन को समझें
अक्‍सर ऐसा माना जाता है कि जब विपरीत सेक्स की बात आती है तो बहुत से लड़के और लड़कियॉ कई चीजों के बारे में एक जैसा सोचते है लेकिन कई जगह मतभेद भी होता हैं। कोई भी आकर्षण व्यक्तित्व का लड़का किसी भी लड़की को आसानी से प्रभावित कर सकता हैं। लेकिन लड़कों के साथ ऐसा नही होता है चाहे वह लड़की को पहली नजर में पसन्‍द कर लें लेकिन वह यह बात आसानी से नही बताते है।

बॉयफ्रेंड की सोच के बारें में टिप्‍स
हम आपको कुछ टिप्‍स के बारें में बता रहे है। इन तथ्यों और सुझावों का उपयोग आप अपने आप को और अधिक दिलकश बनाने के लिए करके देखो, यह आपको निश्चित रूप से बॉयफ्रेंड को प्रभावित करने और बॉयफ्रेंड द्धारा आपको अधिक चाहने में मदद करेंगे। तो आइए अपने बॉयफ्रेंड की सोच के बारें में जानने के लिए इन तथ्यों को समझे।

1 फ़्लर्ट- लड़कों को आसानी से बुरा लग जाता हैं जब उनकी गर्लफ्रेंड उनके सामने किसी और लड़के के साथ फ़्लर्ट करती हैं।

2 टॉप ऑफ द वर्ल्‍ड- एक लड़का उस समय अपने को टॉप ऑफ द वर्ल्‍ड महसूस करता है। जब उसकी गर्लफ्रेंड अन्य लड़कों को नजरअंदाज करके उससे चिपटने लगती हैं। जबकि उस समय अन्‍य लड़के उसकी ओर आकर्षित हो रहे होते हैं।

3 भाग्यशाली- लड़के अपने आपको भाग्यशाली महसूस करते हैं जब इतने सारे अन्य लड़के आपको पसंद करते है और आप उन्‍हें पसंद करती है ऐसे में वह आपको और अधिक प्यार करने लगते हैं।

4 शारीरिक उपस्थिति - लड़के पहली ही नजर में एक लड़की की शारीरिक उपस्थिति द्वारा आकर्षित हो जाते हैं।

5 भावनाएं- लड़के भी अपनी भावनाओं के बारे में बात करना चाहते हैं। सिर्फ इसलिए कि वे दिल की बातचीत करने के लिए आरंभ नहीं करते है इसका मतलब यह नहीं है कि वे इसके बारे में बात करना पसंद नहीं करते।

6 कल्पना- यह हर लड़के की यह वांछित कल्पना होती हैं कि कम से कम जिन्‍दगी में एक बार वह एक साथ कई लड़कियों से घिरा हो।

7 अश्लील चीजें - लड़के बहुत कम उम्र से अश्लील चीजों की ओर आकर्षित हो जाते है। वे लड़की की शारीरिक रचना के बारे में सब कुछ जानने के लिए उत्सुक रहते है और उनकी यह उत्सुकता हमेशा ही बनी रहती हैं। भले ही वह किसी सुन्‍दर सी लड़की के साथ दीर्घकालिक संबंध में भी हो।

8 प्रशंसा - लड़के प्रशंसा पसंद करते है। वह अपने दोस्तों से अक्सर तारीफ सुन कर उतने प्रसन्‍न नही होते जितना की एक लड़की द्वारा अपनी तारीफ सुन कर होते हैं, वह यह तारीफ कभी नहीं भूलते।

9 सेक्स पसंद - लड़कों को सेक्स पसंद होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे हमेशा इसके लिए तैयार रहते हैं।

10 नफरत - लड़के मदद लेने से नफरत करते है, और किसी भी प्रकार की मदद लेने से तब तक बचते है जब तक उन्हें लगता है कि वे इसे खुद से नहीं कर सकते।

11 शक्तिशाली - लड़के उस समय अपने आपको शक्तिशाली महसूस करते है, जब वह लड़की को पूरा संभोग सुख देते हैं। बेहतर संभोग सुख देने पर वह खुद पर गर्व महसूस करते हैं और अपनी गर्लफ्रेंड की अधिक तारीफ करते हैं।

12 गर्लफ्रेंड से प्यार - लड़के अपनी गर्लफ्रेंड से प्यार करते है लेकिन यह बात वह अक्सर नहीं कहतें। लड़के हमेशा अपनी भावनाओं के बारे में मुखर नहीं होते हैं। लेकिन वह उस समय और अधिक सहज महसूस करता है जब वह अपनी गर्लफ्रेंड को जतलाते है कि वह आपसे अपने शब्दों से अधिक अपने कार्यों के माध्यम से प्यार करते हैं।

13 प्रतिस्पर्धी - लड़के बहुत प्रतिस्पर्धी होते हैं और प्रदर्शन की चिंता से ग्रस्‍त रहते हैं। वे हार स्वीकार करना नही चाहते, यह हार खेल में हो या बिस्तर में।

14 जरूरतें - लड़कों को जब उनकी मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक जरूरतों के समय अपनी गर्लफ्रेंड लम्‍बी अवधि तक नही मिलती तो वह भटक जाते है और अन्‍य गर्लफ्रेंड बना लेते हैं।

15 दिल का रास्ता - एक कहावत है जो आपने भी सुनी होगी जो वाक्‍य में सच भी है कि आदमी के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है। आप भी जानें अच्छी तरह से खाना बनाना, और ऐसा खाना बनाए कि भोजन के अंत में आपका बॉयफ्रेंड आप पर फिदा हो जाए।

आप इन टिप्‍स को अपनाकर लड़कों के बारे में जान सकती हैं और साथ ही आप अपने खुद के रिश्तों में इन युक्तियों का उपयोग कर सकती हैं। इन टिप्‍स द्धारा आपका बॉयफ्रेंड निश्चित रूप से आपको और अधिक पसंद करेंगा।

जानें लड़कियों को कैसे लड़के पसंद हैं



वैसे सबकी अपनी-अपनी पसंद होती है लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिनको हर लडकी एक लडके में देखना पसंद करती है। लडकियों को कैसे लडके पसंद है, इस सवाल का एक जबाव नहीं है। लेकिन, आमतौर पर लडकियों की इज्जत करने वाले, नर्म दिल और संस्कारी लड़के ही ज्यादा पसंद आते हैं। इसके अलावा हमेशा साफ-सुथरे और खुशमिजाज नजर आना, हरेक से सम्मान और सभ्यता से पेश आना, तारीफ करने में दिलदार होने जैसे गुण भी लडकियों को भाते हैं। अगर आप स्मार्ट हैं और तब भी लडकी आपकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है तो कुछ अपने व्यवहार में बदलाव कीजिए। आइए हम आपको कुछ बातें बताते हैं जिनसे लडकियां इंप्रेस होती हैं।

लडकियों को कैसे लडके पसंद हैं –

शरीफ लडके –
ज्यादातर लड़कियां ऐसे लड़कों की तरफ आकर्षित होती हैं जो जेंटलमेन हों। जो स्वभाव से बहुत ही सरल और सीधे हो लेकिन जरूरत पडने पर आक्रामक रूख भी अपना सके। लडकों की शराफत लडकियों को ज्यादातर अपनी तरफ आकर्षित करती है।

अकड़ू लडके –
अक्सर लड़कियां हमेशा ऐसे लड़कों की तरफ ध्यान देती हैं जो उन्हें भाव ही न दे। ऐसे लडके जिनकी लड़कियों में कोई खासी रुचि ही न हो। तो अगर आपकी लड़कियों को देखकर मचल जाने की प्रवृत्ति है तो जरा संभल जाइए और अपनी भावनाओं पर काबू रखिए। एकदम से लडकियों के सामने ऐसा व्यवहार मत कीजिए जिससे उन्हें लगे कि आप उन्हें पसंद करते हैं।

दबंग –
लडकियों को लडकों का दबंग स्व्भाव भी बहुत भाता है और लड़कियों को लड़कों का आत्मविश्वास बहुत भाता है। लडकियों को शर्मीले और संकोची लड़के बिल्कुल पसंद नहीं हैं। इसलिए कभी भी बात करने में हिचकिचाएं नहीं और खुलकर अपनी बात कहें।

गंभीर –
लडकियों को स्वाभाव से गंभीर प्रवृत्ति वाले लडके बहुत भाते हैं। लड़कियों को पीछे लगने वाले लड़के कतई पसंद नहीं हैं जो आई लव यू कहते हुए उनके पीछे घूमता रहे। लडकियां ऐसे लडकों को पसंद करती हैं जो अपना आत्मसम्मान बनाए रखे। अगर आपने अपनी फीलिंग्स एक बार उनको बता दी है तो उनसे हर समय उसका जबाब न मांगें।

ख्याल रखने वाला –
लडकियों को ऐसे लडके पसंद आते हैं जो केयरिंग हो। ख्याल रखने की प्रवृत्ति से लडकियों को लगता है कि आप उनका हर समय ख्याल रखेंगे। लडकों का केयरिंग स्वभाव लडकियों को उनके प्रति आकर्षित करता है।

खुशमिजाज –
लडकियों को ऐसे लडके भी पसंद आते हैं जो खुशमिजाज हों। क्योंकि आपके चेहरे की रौनक से आपका नेचर का पता चलता है। अगर आपका चेहरा खिला-खिला रहेगा तो आप जोश से भरपूर दिखते हैं जो लडकियों को आपकी तरफ खींचता है।

सम्मान देने वाले –
लडकियों को महिलाओं का सम्मान करने वाले लडके भी पसंद होते हैं। महिलाओं को सम्मान देने से आपकी महिलाओं के प्रति सोच का पता चलता है। महिलाओं को सम्मान देने से लडकियों को लगता है आप महिलाओं की इज्जत करते हैं।

हालांकि, लडकियों को इंप्रेस करना एक कला है, जिसमें हर कोई माहिर नहीं होता है। लडकों की कुछ स्पेशल क्वालिटी लडकियों को उनकी तरफ आकर्षित करती है। लेकिन अगर आपके पास ये खूबियां नहीं हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। अपनी पर्सनालिटी में थोडा सुधार करके आप इस काबिल बन सकते हैं।

लडकियों को इंप्रेस करना एक कला है, जिसमें हर कोई माहिर नहीं होता है। लडकों की कुछ स्पेशल क्वालिटी लडकियों को उनकी तरफ आकर्षित करती है। लेकिन अगर आपके पास ये खूबियां नहीं हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। अपनी पर्सनालिटी में थोडा सुधार करके आप इस काबिल बन सकते हैं।

सबकी अपनी-अपनी पसंद होती है, लड़कियों को कैसे लड़के पसंद है, इस सवाल का एक जवाब नहीं है। लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिनको हर लड़की एक लड़के में देखना पसंद करती है। लड़कियों को तमीज से बोलने वाले, दूसरों इज्जत करने वाले, नर्म दिल और संस्कारी लड़के ज्यादा पसंद आते हैं। इसके अलावा हमेशा साफ-सुथरे और खुशमिजाज नजर आना, हरेक से सम्मान और सभ्यता से पेश आना, तारीफ करने में दिलदार होने जैसे गुण भी लडकियों को भाते हैं।

अगर आप स्मार्ट हैं और तब भी लडकी आपकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है तो कुछ अपने व्यवहार में बदलाव कीजिए। आइए हम आपको कुछ बातें बताते हैं जिनसे लडकियां इंप्रेस होती हैं।

शरीफ लड़के
ज्यादातर लड़कियां ऐसे लड़कों की तरफ आकर्षित होती हैं जो जेंटलमेन हों। जो स्वभाव से बहुत ही सरल और सीधे हो लेकिन जरूरत पडने पर आक्रामक रूख भी अपना सके। लडकों की शराफत लड़कियों को ज्यादातर अपनी तरफ आकर्षित करती है।

अकड़ू लड़के
कई लड़कियां ऐसे लड़कों की तरफ ध्यान देती हैं जो उनसे रूठे-रूठे रहें। ऐसे लड़के जो अपनी धुन में रहना पसंद करते हों और लड़कियों को खास तवज्‍जो न देते हों। तो अगर आपकी लड़कियों को देखकर मचल जाने की प्रवृत्ति है तो जरा संभल जाइए और अपनी भावनाओं पर काबू रखिए। एकदम से लड़कियों के सामने ऐसा व्यवहार मत कीजिए जिससे उन्हें लगे कि आप उन्हें पसंद करते हैं।

दबंग
लड़कियों को लड़कों का दबंग स्वभाव भी बहुत भाता है। लड़कियों को लड़कों का आत्मविश्वास बहुत भाता है। लड़कियों को शर्मीले और संकोची लड़के बिल्कुल पसंद नहीं हैं। इसलिए कभी भी बात करने में हिचकिचाएं नहीं और खुलकर अपनी बात कहें।

गंभीर
लड़कियों को स्वभाव से गंभीर प्रवृत्ति वाले लडके बहुत भाते हैं। लड़कियों को पीछे लगने वाले लड़के कतई पसंद नहीं आते। 'आई लव यू' कहते हुए आगे-पीछू घूमने वाले लड़कों को लड़कियं 'चिपकू' समझती हैं। लड़कियां ऐसे लड़कों को पसंद करती हैं जो अपना आत्मसम्मान बनाए रखें। अगर आपने अपनी फीलिंग्स एक बार उनको बता दी है तो उनसे हर समय उसका जवाब न मांगें।

खयाल रखने वाला
लड़कियों को केयरिंग लड़के पसंद आते हैं। खयाल रखने की प्रवृत्ति से लड़कियों को लगता है कि आप उनका हर मुश्किल वक्‍त में साथ निभाएंगे। लड़कों का केयरिंग स्वभाव लडकियों को उनके प्रति आकर्षित करता है। और वे ऐसे लड़कों पर पूरा भरोसा करती हैं।

खुशमिजाज
लड़कियों को ऐसे लडके भी पसंद आते हैं जो खुशमिजाज हों। क्योंकि आपके चेहरे की रौनक से आपका नेचर का पता चलता है। अगर आपका चेहरा खिला-खिला रहेगा तो आप जोश से भरपूर दिखते हैं जो लड़कियों को आपकी तरफ खींचता है।

सम्मान देने वाले
महिलाओं का सम्मान करने वाले लड़के उन्‍हें काफी पसंद आते हैं। महिलाओं को सम्मान देने से आपकी महिलाओं के प्रति सोच का पता चलता है। महिलाओं को सम्मान देने से लडकियों को लगता है आप महिलाओं की इज्जत करते हैं।

क्‍या करें जब ऑफिस में टूटे दिल

इस गम से उबर पाना आसान नहीं। अक्सर लोग उसे भूलकर आगे बढ़ने के लिए अपने काम में डूब जाते हैं। लेकिन, पुराना साथी अगर आप ही के ऑफिस में हो तो... सवाल पेचीदा है और जवाब शायद उससे भी ज्यादा।


दिल टूटने की आवाज सुनी है कभी। बहुत शोर होता है भीतर ही भीतर। वो बात दीगर है कि बाहर किसी को सुई गिरने की आवाज भी शायद ही आती हो। लेकिन, उसका दर्द तो वही जानता है जिसने इसे महसूस किया हो। लेकिन, जो थम जाए वो जिंदगी कहां।

एक ऑफिस में साथ काम करने वाले लोगों के बीच भावनात्मक संबंध बनाना अस्वाभाविक नहीं। वे काफी वक्त एक-दूजे के साथ बिताते हैं। एक दूसरे की अच्छी बुरी बातों और आदतों के बारे में उन्हें पता होता है। एक दूसरे की पसंद-नापसंद से भी वे अच्छी तरह वाकिफ हो जाते हैं। और उनकी सोच अगर मिलती हो तो अक्सर दोनों के बीच एक सॉफ्ट कॉर्नर हो पैदा हो जाता है। और अक्सर यह रिश्ता दोस्ती की सीढि़यां चढ़ते हुए मोहब्बत के बाग में दाखिल हो जाता है।

लेकिन, कई बार इस बाग में बहार आने से पहले खिजा चली आती है। किसी के लिए भी यह वक्त बेहद मुश्किल हो सकता है। कॅरियर और निजी जीवन की ऊहापोह के बीच जीना दूभर हो जाता है। निजी जीवन का असर काम पर पड़ने लगता है। दफ्तर में रोज अपने एक्स से रूबरू होना, उसके साथ रहना, बात करना और इन सबके बीच अपनी निजी बातों को किनारे रखना, इतना आसान कहां होता है यह सब। बाद दिल से निकलकर दिमाग तक पहुंच जाती है। इसके चलते मानसिक तनाव तक हो सकता है। इन सबका सामना करने के‍ लिए मानसिक दृढ़ता और व्यावहारिकता की जरूरत होती है। जिस रिश्ते को आपने इतने प्यार और जज्बात से सींचा हो उसे भूलकर आगे बढ़ने में वक्त लगता है। और किसी-किसी के लिए यह बहुत आसान नहीं होता। लेकिन बढ़ना तो पड़ेगा ही।

कुछ तरीके हैं जिन्‍हें अपनाकर आप ऑफिस में दिल टूटने के दर्द को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।

मजबूत बनें
कभी जिस चेहरे से आपकी नजरें नहीं हटती थीं आज आप दुआ करते हैं कि आपका उनसे सामना ना हो। बेशक, आपके लिए बहुत मुश्किल होगा बार-बार ऑफिस में उनका सामना करना लेकिन इसके लिए खुद को दोषी मान कर ऑफिस से ब्रेक लेनें या ऑफिस छोड़ने की जगह आपको हिम्मत से काम लेना होगा और इस स्थिति का सामना करना चाहिए। वक्त एक ऐसा मरहम है जो आपके सारे घावों को भर देगा।

बीती ताहि बिसार दे
जिंदगी रुकने का नाम नहीं है। जिंदगी का नियम है आगे बढ़ते रहना और आवश्यकता भी। हालांकि, यह कहना आसान है और करना मुश्किल। लेकिन,अपना करियर और निजी जीवन दोनों बचाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ता है।

हकीकत को स्वीकारें
सबसे जरूरी बात है कि वास्तविकता को स्वीकार किया जाए। खुद को यह समझाएं और मनाएं कि रिश्ता‍ अब खत्म हो चुका है। अपना ध्यान और अपनी संपूर्ण ऊर्जा काम में लगाएं। बेशक , उसके साथ आपका मजबूत भावनात्म‍क संबंध था। और साथ बिताए उन लम्हों की तलछट अब भी आपके दिल में कहीं बाकी है। लेकिन, अब वह सिर्फ आपका सहयोगी है। दफ्तर में उसके साथ अन्य सहयोगियों सा ही बर्ताव करें। अपना व्यवहार नियंत्रित रखें और उससे यह जाहिर न होने दें कि आप अभी पुराने संबंधों में ही जी रहे हैं।

न करें एक दूजे की बुराई
अपने सहयोगियों और अन्य सहकर्मियों से एक-दूसरे की बुराई न करें। ऐसा करके आप भले ही रिश्ता के खत्म होने के लिए सामने वाले को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन इसका विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना अधिक होती है।

जिंदगी फिल्म नहीं हकीकत है
फिल्मों में अक्सर अपने पूर्व प्रेमी/प्रेमिका को जलाने के लिए किसी अन्य शख्स का सहारा लेते‍ दिखाया जाता है। यूं माना जाता है कि अगर वह आपको किसी और के साथ देखेगा तो उसे जलन होगी। लेकिन, सही मायने में यह सब बस फिल्मों में ही होता है। असल जिंदगी में 'यू-टर्न' जैसी कोई चीज नहीं होती।

दूरियां भी है जरूरी
जहां तक संभव हो सके एक दूसरे से दूरी ही बनाए रखें। आपस में सिर्फ दफ्तर के काम से जुड़ी बातें ही करें। निजी संवाद और बातचीत न करें। जख्मों को कुरेदने का कोई फायदा नहीं।

निजी बातों को निजी ही रखें
कई लोग सोचते हैं कि दफ्तर के कंप्यूटर के जरिए वे जो बातें करते हैं उसे कोई और नहीं देख सकता। लेकिन, ऐसा नहीं है। दफ्तर के कंप्यूटर का सारा डाटा सर्वर पर सुरक्षित रहता है। ऐसे में अपनी बेहद निजी बातों और निजी संबंधों की चर्चा दफ्तर के कंप्यूंटर पर न ही करें। वर्ना वे ऑफिस गॉसिप का हिस्सा बन सकती हैं।

करियर पर दें ध्यान
हालांकि ब्रेकअप का असर बेशक आपके कॅरियर और निजी जीवन पर पड़ता है। लेकिन, इससे संभलकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमानी है। कहने और करने में अंतर है, लेकिन खुद पर यकीन रखें और जीवन के अन्य। सकारात्मक पहलुओं को देखते हुए आगे बढें।

ऑनलाइन फ्लर्ट करने के टिप्‍स

सोशल नेटवर्किंग साइट के द्वारा फ्लर्टिंग करना आजकल आम हो गया है। कुछ लोग फ्लर्टिंग में सामने वाले का दिल जीत लेते है तो कुछ के हाथ खाली रहते हैं। लेकिन अब ऑनलाइन फ्लर्ट के इन टिप्सों को अपनाकर आप किसी का भी दिल जीत सकते हैं।


लम्‍बे मैसेज ना करें
अपने मैसेज या अपडेट्स को छोटा रखें क्योंकि अगर आपका मैसेज या अपडेट्स छोटा होगा तो आपको उसका रिप्लाई भी मिलेगा। अक्सर यह देखा गया है कि लोग बड़े मैसेज नहीं पढ़ते हैं। कभी भी कुछ ऐसा अपडेट या वाल पोस्ट ना करें जो अश्लीलता हो। वही पोस्ट करें जो आप कभी भी किसी भी समय किसी को दिखा सकें।

रिप्लाई आराम से दें
जल्दबाजी से काम बिगड़ता है। इसलिए मैसेज की रिप्लाई आराम से दें और जल्दबाजी में कभी भी पार्टी के लिए आमंत्रित ना करें। कभी भी झूठा ट्वीट या अपडेट ना करें, इससे सामने वाले का विश्वास आप पर घटता है। मतलब जल्दी-जल्दी ट्वीट या अपडेट्स ना करें।

फोटो अपलोड करें
पिछली रात अगर अपने कोई पार्टी की थी तो उसकी फोटो अपलोड करें और हो सके तो उसमें टैग भी करें। ध्‍यान रखें अपडेट्स करते समय केवल छः-सात शब्दों का प्रयोग करें। ऐसा करने से दूसरे व्यक्तियों में आपके बारे में उत्सुकता बढ़ती है। अगर आप ऑनलाइन या एसएमएस से फ्लर्ट कर रहे हैं तो यह बहुत मायने करता है कि आप टेक्स्ट में क्या लिख रहे हैं।

टेक्स्ट फ्लर्ट के टिप्स
आप किसी से टेक्स्ट से फ्लर्ट कर रहे हैं, तो ऐसे में फर्स्ट इंप्रेशन बहुत मायने करता है।

आपका चैट व एसएमएस हमेशा ह्यूमरस होना चाहिए। इससे सामने वाला आपसे बोर नहीं होगा और वह आपमें दिलचस्पी भी लेगा।

आप टेक्स्ट में सामने वाले से ज्यादा सवाल ना पूछें। इससे जवाब देने वाला बोर होने लगता है।

आप इमोशनल टेक्स्ट लिखें, ताकि आपकी फीलिंग्स सामने वाला समझ सके।

आप जब भी अकेला महसूस करें, तब टेक्स्ट बिल्कुल ना करें। इससे सामने वाले को लगेगा कि यह आपकी आदत में शुमार है। आप जब भी रिलैक्स फील करें, तभी टेक्स्ट से चैट करें।

आप टेक्स्ट में गंभीर बातें बिल्कुल ना करें, बल्कि फनी बातचीत या कॉलेज, आफिस वगैरह की बातें शेयर करें।

बातें जो महिलाएं पुरूषों को नहीं बतातीं

अक्सर आपने यह बात किसी न किसी से सुनी होगी कि किसी भी महिला को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है उसे तो ऊपर वाला भी नहीं समझ पाया तो हम क्या चीज हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या महिलाओं को समझना वाकई इतना ज्यादा मुश्किल है? तो इसका जवाब है शायद नहीं। यह इसलिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि बहुत सी ऐसी बातें है जो महिलाएं पुरूषों को नहीं बतातीं।


बहुत से ऐसे पुरूष हैं जो कि वास्तव में यह जानना चाहते हैं कि महिलाएं वास्तव में क्या चाहती हैं। ऐसा कौन सा गिफ्ट हो सकता है जो उन्हें आकर्षित करे या वो ऐसा क्या करें कि वो अपनी प्रेमिका का दिल जीत सकें।

महिलाएं अपनी बातें इसलिए नहीं छुपाती कि वह डरती है बल्कि इसलिए कि वह इन बातों को सिर्फ खुद तक रखना पसंद करती है। और तो और महिलाओं के लिए वह समय गर्व का होता है जब उनकी बातों को कोई बिना कहे समझ जाये। आइए
जानें वो बातें जो महिला पुरूषों को बताना पसंद नही करती।

सोशल मीडिया वेबसाइट द्वारा सिंगल एवं कम्मिटेड महिलाओं पर हुए एक सर्वे के दौरान महिलाओं से पूछा गया- कि आप अपने ब्वायफ्रेंड से क्या छुपाती हैं? शुरूआत में तो कोई भी कुछ नही बोली। बहुत सारी महिलाएं अपने छुपे रहस्य बताने से घबरा रही थीं, जो सीधे इशारा कर रहा था कि बहुत कुछ है जो इस खामोशी के पीछे छुपा हुआ है। लेकिन धीरे-धीरे कुछ बोल्ड तथा निडर महिलाओं के जवाब से सर्वे पोल में एक बहुत ही तेज बढ़ोत्तरी हुई।

आदतें
लड़कियों की कुछ आदतें होती हैं जो वह लड़को को बताना पसंद नही करतीं जैसे उन्हें काक्रोच से डर लगता है लेकिन गर्म वैक्स से नहीं घबरातीं। सभी के सामने खाने से इंकार करती हैं लेकिन अकेले में जमकर खाती हैं। जिसको सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज करेंगी उसी को ज्यादा मानती हैं।

प्रेम प्रसंग
लड़की अपनी पिछली जि‍न्दगी के बारे में वर्तमान ब्वायफ्रेंड को कुछ नहीं बतातीं। क्योंकि बहुत सारी लड़कियां अपने चरित्र पर उंगली उठने से डरती हैं। कुछ लड़कियां यह महसूस करती हैं कि उनके पुराने रिश्ते के बारे में जानकर उनके पार्टनर को अच्छा नहीं लगेगा, जलन होगी या उनकी कोई बात रिश्ते में दूरियां ना पैदा कर दे।

रिश्तेदारों के लिए भावना
आपने किसी भी लड़की से उसकी अपनी बहन के सुन्दर और समझदार होने, माता पिता के प्यार व देखभाल करने की और उसके भाई के बहुत ही आकर्षक होने की बात तो सुनी होगी पर ये सारी बातें आपके परिवार के लिए भी कहे तो ज्यादा खुश ना हों। सर्वे से यह बात भी सामने आई कि लड़कियां रिश्तेदारों के बारे में अपनी सच्ची भावना नहीं बतातीं।

मेकअप किट
ज्यादातर महिलाएं अपनी मेकअप किट के बारे में पुरूषों को नहीं बताना चाहती हैं। वह हमेशा अपनी सुन्दारता से पुरूषों को सरप्राइज करना चाहती है लेकिन वह यह नही बताना चाहती कि यह सुन्दिरता मेकअप का कमाल है।

पुरानी बातें
शायद आपको तो पता ही होगा कि आपसे पहले भी उसकी एक ज़िन्दगी थी। और अगर कोई पुरूष यह जानना चाहता हैं कि वह आपसे रिश्तें में होने के बाद क्या वो अब भी अपनी पहले की ज़िन्दगी के बारे में कुछ महसूस करती है। तो वह सारी बातें आपको बताने में कभी सक्षम नहीं होगी, जबकि एक महिला के दिल में इतनी गहरी भावनाएं होती हैं।

बातों के दायरे
महिलाएं अपनी बातों के दायरे के बारे में किसी को नही बताती खासकर पुरूषों को। कुछ महिलाओं का कहना है कि वह अपने दोस्तों का कोई भी रहस्य अपने पार्टनर को नहीं बताती हैं क्योंकि उनके अनुसार इसका उनके संबंधों से कुछ लेना देना नहीं है, और अगर वह भूल से बता भी देती है तो इससे उनकी निजी ज़िन्दगी में भी मुश्किलें आ सकती हैं।

याद रखिये वे भले ही आपकी साथी हैं, लेकिन उनका भी अपना निजी जीवन है। और आपको इस निजता का सम्‍मान करना चाहिये। जरूरी नहीं कि आपको हर बात बताइ जाये, आपको हर बात जानने की इच्‍छा भी नहीं करनी चाहिए।

गर्लफ्रेंड का दिल जीतने के लिए आजमायें ये उपाय

अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड का दिल जीतना चाहते है, और उसके होंठों पर मुस्कान देखना चाहते हैं। तो कुछ उपाए जरूर अपनाएं, जिससे आपकी गर्लफ्रेंड खुश हो जाएं। आइए कुछ ऐसी ही बातों को जानते हैं। जिससे आप अपनी गर्लफ्रेंड के दिल जीत सकें-


सुगंध का इस्‍तेमाल
लड़कियों को सुगंध बहुत पसंद होती है। इसलिए जब भी आप अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने जाएं, तो कोलोन, डिओ, परफ्यूम का इस्तेमाल जरूर करें। फिर देखिए उन पर क्या जादू चलता है।

गर्लफ्रैंड की बातों पर ध्‍यान दें
आप अपनी गर्लफ्रैंड की बातों को ध्यान से सुनें। क्यों कि हर लड़की चाहती है कि उसका प्रेमी उसका ख्याल रखे। इससे उसे यह महसूस होगा कि आप उसके सच्चे साथी हैं जो सुख-दुःख में काम आते हैं। अपनी गर्लफ्रेंड की तारीफ करें और बातों-बातों में यह जरूर कहे कि वह खूबसूरत है।

उसकी पसंद का ख्‍याल रखें
अपने आप को उसके अनुसार ढालने की कोशिश करें। वह क्या पसंद करती है और क्या नहीं यह जानने की कोशिश करें। जब डिनर पर जाएं तो आप उसकी पसंद का खाना ही खाएं। बाते करते वक्त उनका हाथ कुछ सेकंड के लिए जरूर थामें। जब भी आप उनसे मिले प्यार से उनके सिर को चूमें।

छोटी से छोटी बात का खयाल
अपनी गर्लफ्रेंड को इस बात का अहसास करवाएं कि आप उनसे प्यार करते है। उन्हें बराबर यह बात कहते रहें कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं। अगर वह परेशान है तो उन्हें गले लगाकर इस बात का एहसास दिलाएं कि वह आपके लिए कितना मायने रखती है। उनकी हर छोटी से छोटी बात का भी ख्याल रखें, क्योंकि यह प्यार का बहुत जरूरी हिस्सा होता है।

गर्लफ्रेंड के साथ मस्‍ती करें
कभी-कभी उनके पसंदीदा गाने भी उन्हें सुनाएं। आप अपनी गर्लफेंड को अपने परिवार और दोस्तों से मिलवाएं, इससे आपके प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा। प्यार का इजहार करने के लिए उनके बालों को प्यार से सहलाएं। कभी-कभी आप उनके साथ मस्ती भी करें, जैसे गुदगुदाना, कुश्ती करना। गर्लफेंड को बाहर घूमने लेकर जाएं और अपने दिल की बातें कहें। उन्हें खुश रखने के लिए और हंसाने के लिए जोक्स सुनाएं।

तोहफा दें
आधी रात को एसएमएस कर उन्हें बताएं कि आप उन्हें कितना 'मिस' कर रहे हैं। खुश करने के लिए उनकों फूलों का तोहफा दें। हो सकता है आपके पास तोहफा देने का कोई अवसर ना हो। बिना किसी ऐसे अवसर के भी उन्हें तोहफा दें। उनके साथ अच्छा टाइम ‍बिताएं, कभी-कभी उनके साथ भी डांस करें।

लड़कियों की बातों की और उनके प्या‍र की कद्र करें। अगर आपको उनकी कोई बात पसंद ना हो, तो तुरंत ना कहे, बल्कि बाद में आराम से कहे, और अच्छे‍ अंदाज में कहें। खासकर कोई काम स्पेशली उसने आपके ही लिए किया है, जो आपको पसंद ना आया हो, फिर भी आप तुरंत जाहिर ना होने दें, बाद में आराम से समझाएं।

सोलहवें हफ्ते में पहली बार महसूस होती है शिशु की हलचल

गर्भावस्था के सोलहवें सप्‍ताह में आपको गर्भस्थ शिशु की हलचल महसूस होनी शुरू हो जाएगी, इसे स्पन्दन कहते हैं। स्‍पन्‍दन की क्रिया 16वें से 20वें हफ्ते के बीच होती है। आप इस क्रिया को छठें या सातवें महीने तक महसूस कर सकती हैं।



पहली बार गर्भवती हुई महिलाओं को स्‍पन्‍दन के बारे में समझने में समय लगता है। सोलहवें हफ्ते में चिकित्सक आपको कुछ प्रसव पूर्व परीक्षण कराने के बारे में कह सकते हैं। इस तरह की जांच से शिशु में आनुवंशिक समस्याओं या असामान्यताएं की जांच होगी। सोलहवें हफ्ते में, प्रतिरक्षा प्रणाली गर्भावस्था की वजह से कमजोर हो जाती है। फ्लू और सर्दी की तरह आम बीमारियों के लिए चिकित्सक की बताई बातों को मानें। आपको ऐसे संभावित स्थान से दूर रहना चाहिए, जहां आपको चेचक या रूबेला पकड़ने का खतरा हो सकता है।

डॉक्टर आपको एएफपी, ट्रिपल परीक्षण या एमनिओसेनटेसिस जैसे परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। इन परीक्षणों से चिकित्सक बच्चे का विकास किस गति से चल रहा है इसका पता लगा सकते हैं। आप डॉक्टर से किसी भी जन्म के पूर्व वर्गों के बारे में पूछ सकती हैं, जिसमें आप हिस्सा ले सकती हैं। इससे आप अपने अन्‍य गर्भावस्‍था के हफ्ते के बारे में साथ ही प्रसव के दौरान क्या होता है, इसके बारे में अधिक जान सकती हैं।
शिशु का विकास

सोलहवें हफ्ते में बच्चे कि लंबाई 17.5 सेंटी मीटर और वजन 160 ग्राम तक होता है। शिशु को गर्भाश्‍य में घूमने के लिए अधिक जगह है, इसलिए वह अधिक घूमना शुरू कर देगा।

बच्चा गर्भायश्‍य में हथेलियों से झपटना, पैरों से लात मारना और कुलाटी भी मार सकता है। बच्चे के बड़े होने के साथ गर्भाश्‍य में जगह कम होती जाती है, आपको इन गतिविधीयों का अधिक महसूस होना शुरू होगा।

बच्चा चूसना शुरू कर देगा, अगर एमनिओटिक द्रव में कड़वा स्वाद आता है तो आप सोनोग्राम में बच्चे को निगलना बंद करते हुए पाएंगी।

बच्चे को हिचकी भी आ सकती है। जैसे बच्चा बढ़ेगा, वैसे आपको जब भी बच्चे को हिचकी आएगी, उसका पता चलेगा, आप उसे महसूस कर सकेंगी।

गर्भावस्‍था की इस अवस्था में शिशु मजबूत उत्तेजना देने वाले दृश्य के प्रति प्रतिक्रिया करते और अपने हाथों का उपयोग करके मजबूत दृश्यों से अपनी आंखों की रक्षा करेगा। अब तक बच्चा और नाल का आकार समान मात्रा में है।

सिर और गर्दन सीधी हैं, अगर बच्चा सोनोग्राम करते वक्‍त सही स्थिति में हैं, तो बच्चे के लिंग का भी पता चल सकता है।

इस समय तक बच्चे कि मूत्र प्रणाली और रक्‍त संचार प्रणाली बेहतर तरीके से कार्य करने लगती है। बच्चा अब एक दिन में 25 क्वार्ट रक्‍त पम्पिंग करना शुरू कर देगा। गर्भावस्था के अंत तक यह एक दिन में 1900 क्वार्ट तक पहुंच जाएगी।

शरीर में परिवर्तन
गर्भावस्था का सोलहवां हफ्ता अहम सप्‍ताह है। इस सप्‍ताह में डॉक्टर डाउन सिंड्रोम या स्पायना बायफिडा के लिए एएफपी नामक परीक्षण कर सकते हैं। इसके लिए आपका एक रक्‍त परीक्षण होता है, इससे बच्‍चे को कोई भी खतरा नहीं है। सात दिन या उससे भी कम समय में आपको जांच के परिणाम मिल सकते हैं। दूध ग्रंथियों ने स्तनों में दूध का उत्पादन शुरू कर दिया है, ऐसा आपको महसूस होगा। स्तनों में खून के परिसंचारण के कारण स्तन की नसें स्पष्ट रुप से दिखाई देंगी।

बच्चे का विकास जारी है, इसलिए आपको दर्द महसूस होगा। इस दौरान पीठदर्द की शिकायत आम बात है। आराम करने से दर्द में राहत मिलती है। पेट का हर हफ्ते विस्तार होगा। आपको पीठ पर सोने की बजाय करवट लेकर सोना चाहिए। तकिया के प्रयोग से आपको सहज लगेगा। यह आपके पेट का तनाव और दबाव भी दूर करेंगे।

क्या उम्मीद की जाती है
अब आपको आपको पहले की तुलना में सुबह के समय होने वाली बीमारी काफी कम हो गई है। आपका गर्भावस्था के प्रति समायोजन करने का समय खत्म हो सकता है, और आप गर्भावस्था से परिचित हो चुकी हैं। आपको बच्चे कि गर्भाश्‍य में होने वाली गतिविधि का अनुभव स्पन्दन शुरु हो सकता है। जैसे-जैसे महीने आगे बढ़ेंगे़ ये अनुभव और अधिक महसूस होना शुरु होगा।

जब स्‍पंदन शुरू होता है, तो आपको शुरूआत में यह भी पता नहीं चल पाता कि यह बच्चे की गतिविधि है। बच्चे कि गतिविधि में समय के साथ वृद्धि होगी। आपका वजन बढ़ाना जारी रहेगा, लेकिन इसे नियंत्रण में रखने की कोशिश बनाए रखें। फल और सब्जियों का ज्‍यादा सेवन करें। यदि आपके मन में आहार योजना या एएफपी परीक्षण के बारे में कोई प्रश्‍न हैं, तो डॉक्‍टर से पूछने का यही समय है।

सुझाव
सोलहवां हफ्ते का समय काफी अहम है। यदि आपका किसी भी प्रकार का आनुवांशिक इतिहास है, तो उसके बारे में चिकित्सक से बात करें। यह परीक्षण गर्भावस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी भी प्रकार के डर और चिंता की बात अपने साथी और अपने चिकित्सक से जरूर करे। गर्भ में पल रहे शिशु के लिए तनाव अच्छा नहीं होता।

डॉक्‍टर के पास अपांइटमेंट पर जाना जारी रखे। आपको सोनोग्राम और दिल की धड़कन सुनने का हर बार आनंद लेना चाहिए। बच्चे के विकास को देखना काफी अच्‍छा अनुभव होता है। दिल की धड़कन दुनिया में सबसे अच्छी आवाज है। जब भी संभव हो, आप ही नहीं बल्कि बच्चे के पिता भी इसका आनंद ले सकते हैं।

सत्‍ताइसवें हफ्ते में निश्‍चित होता है शिशु के सोने-जागने का समय

सत्‍ताइसवें हफ्ते के साथ आपने गर्भावस्था की तीसरी और अंतिम तिमाही में प्रवेश कर लिया है। यदि आप शिशु के जन्‍म से पूर्व जानकारी देने वाली कक्षाओं में जाने का प्‍लान कर रही हैं, तो इसके लिए यह समय ठीक है।


अस्पताल आपको गर्भावस्‍था के हफ्तों के अगले कुछ हफ्तों में प्रवेश फार्म भेज देंगे और वे बच्चे के जन्म से संबंधित जानकारी की कक्षाओं में भाग लेने की सलाह देते हैं। इन वर्गों में आपको बच्चे के जन्म के दौरान सांस लेने की तकनीक और कुछ व्यायाम सिखाएंगे, जो बच्चे के जन्म को तनावमुक्‍त और आरामदायक कर देगा। गर्भावस्था के इस स्तर पर आपको डॉक्टर से प्रसव के विकल्प पर चर्चा करनी चाहिए।

यदि आपने गर्भावस्था के दौरान अभी तक संतुलित आहार नहीं लिया है, तो अब भी आप इसे शुरू कर सकती हैं। अंतिम कुछ हफ्तों में आप बच्चे को ज्‍यादा से ज्यादा पोषण दे सकती हैं। केवल कैलोरी ही गर्भस्‍थ शिशु को स्वस्थ नहीं रख सकती। जो खाना आप खा रही हैं, उससे ही बच्‍चे का विकास होता है। इसलिए अंतिम महीनों में स्वस्थ आहार लेने की कोशिश करें। फल और सब्जियों का अधिक सेवन करें व तले हुए भोजन से परहेज करें।

बच्चे का विकास
गर्भावस्था के 27वें हफ्ते में बच्चे की लंबाई 14 से साढ़े चौदह इंच के करीब और वजन 2 पाउंड के करीब होगा। इसके बाद शिशु का वजन तेजी से बढ़ेगा। अंतिम हफ्तों में तो प्रति सप्‍ताह आधा पाउंड तक वजन बढ़ता है। गर्भस्‍थ शिश की त्वचा झुर्रियों वाली होती है, क्योंकि वह पिछले पांच महीनों से पानी से घिरा है। बच्चे की त्वचा पैदा होने के बाद भी कुछ हफ्तों तक झुर्रियों वाली दिखेगी। त्वचा का बाहर खिंचाव होगा और चिकनी दिखेगी।

बच्चे कि रेटिना का अच्छी गति से विकास हो रहा है, वे जल्द ही बच्चे को प्रकाश छवियों को समायोजित करने में मदद करने के लिए सक्षम हो जाएंगी। इन परतों को मस्तिष्क को प्रकाश और कुछ छवियों को प्राप्‍त करने के साथ ही मस्तिष्क को वो क्या देख रहे है इसकी सूचना प्रसारित करने में मदद करने के रूप में अच्छी तरह सक्षम माना जाता है। बच्चे की आंखों को ढकने वाली झिल्ली अलग होना शुरू हो जाएगी। कुछ हफ्तों में बच्चा आंखें खोलनें में सक्षम हो जाएगा।

अधिकांश बच्चो की जन्म के समय आंखें नीली होती हैं। अगर आंखों का रंग जन्म के बाद बदलने वाला है, तो यह जन्म के कुछ ही हफ्तो पहले शुरु हो जाएगा। गर्भावस्था में इस सप्‍ताह में बच्चा सोने का और जागने का एक समय बना लेता है। आपको जल्द ही इसका अहसास भी हो जाएगा। यदि आपके सोने का समय शिशु के सोने के समय से विपरीत हैं तो इसको मिलाने की कोशिश करें। जब गर्भ में पल रहा शिशु सो रहा है, आप भी उसी समय सोने की कोशिश करें।

कई बार आप सोने की कोशिश करती हैं, लेकिन उस समय आपको शिशु की लात महसूस होगी। कहा जाता है कि बच्चा गर्भ से ही सपना देखना शुरू करता है। मस्तिष्क अभी भी सक्रिय है और मस्तिष्क की सतह की झुर्रियां प्रदर्शित होना शुरु होंगी, क्‍योंकि अब मस्तिष्क के ऊतकों का विकसित होना शुरू हो जाएगा। बच्चे हिचकी ले रहा है, इसका अहसास भी आपको होगा। अब उसके फेफड़ें परिपक्व हो रहे हैं और वे सांस लेने का अभ्यास कर रहे हैं।

शरीर में परिवर्तन
सत्‍ताइसवें हफ्ते में शरीर को और अधिक उष्मांक सेवन की जरूरत होगी। 300 से 350 कैलोरी के साथ शुरूआत करना सुरक्षित होगा। गर्भावस्था के 36वें या 37वें सप्‍ताह तक आपका अधिक वजन वजन बढ़ेगा। इस समय तक कई महिलाओं को लगता है कि वे मोटी लग रही हैं और यह उनके लिए सही नहीं है। लेकिन ध्‍यान रखें कि आप कम कैलोरी के लिए आहार में बदलाव न करें। कम खाने से आप बच्चे को कैलोरी से वंचित कर रही हैं।

वजन के बारे में चिंतित हैं तो डॉक्टर से बात करें। आप एक बच्चे का भी वजन उठा रही है, इसलिए बच्चा पैदा होने के बाद आपका उतना वजन उसी समय कम हो जाएगा। जन्म के पूर्व विटामिन और पोषक तत्वों की खुराक लेना जारी रखे। इस सप्‍ताह में गर्भाश्‍य रिब पिंजरे पर झुकता है। गर्भाश्‍य फेफड़ों को पूर्ण विस्तार करने से रोकता है, जिसके कारण सांस लेने की कुछ समस्याएं होंगी। डॉक्‍टर से बात करे लेकिन आपको चिंता नहीं करनी चाहिए।

आपने तीसरी तिमाही में प्रवेश किया है, तो अब समय से पहले प्रसव की चेतावनी के संकेत के बारे में डॉक्टर से बात करें। गर्मी के महीनों में हाइड्रेशन की कमी कारण ऐसा अधिक होता है। हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है, पानी की बोतल हर समय अपने साथ रखे। आपको ज्‍यादा बाथरूम में जाना पडता है, लेकिन आपको हाइड्रेटेड रहने के लिए यह करना हैं।

चेतावनी के संकेतों में योनि क्षेत्र से चमकीला लाल रक्‍त बहना है। यदि आपको योनि क्षेत्र से अचानक पानी के निर्वहन का अनुभव होता है, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। श्रोणि क्षेत्र में गंभीर दर्द या पीठ के निचले हिस्से में बहुत ही सुस्त दर्द का अनुभव हो सकता है। कुछ महिलाओं को एक घंटे या उससे अधिक समय तक संकुचन महसूस होता है। यदि आपके हाथ और पैर फूलते हैं तो यह समय से पहले प्रसव का संकेत हो सकता है।

क्या उम्मीद की जाती है
जब आप गर्भावस्था के इस स्तर तक पहुंचती हैं तो बच्चे की हलचल महसूस होने का मतलब है कि सब कुछ ठीक है। यह बात महिलाओं को सहज महसूस कराती हैं और आत्मविश्‍वास बढ़ाती है। आपके पेट के क्षेत्र में वजन ढ़ने के कारण आपको बच्चे की लात महसूस नहीं हो सकती हैं। यदि आपको लगता है कि बच्चा थोड़ा सक्रिय है और आप पहले जैसा महसूस नहीं कर रही हैं, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। बाद में पछताने से अच्‍छा है सतर्क रहना।

आपको कब्ज, पैरों में ऐंठन, अस्थिबंध दर्द और लगातार बाथरूम जैसी परेशानी हो सकती है। डॉक्‍टर के पास जांच के लिए आपका जारी है। वे आपके रक्‍तचाप, वजन और मूत्र की लगातार जांच करते रहते हैं। तीसरी तिमाही में आपको उच्च रक्‍तचाप या पूर्व एक्लंप्षण नामक हालत से सावधान रहना होगा। इस हालत का मूत्र परीक्षण के माध्यम से निर्धारण किया जा सकता है, यह तब होता है जब मूत्र में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है।

सुझाव
गर्भावस्था का यह चरण महत्वपूर्ण है। आपको शारीरिक और मानसिक दोनों स्थितियों से स्वस्थ रहना है। जन्म के पूर्व के विटामिन लेना और अपने आहार में फल और सब्जियों को जोड़ना जारी रखना है। यदि आपको लगता है कि कुछ ठीक नहीं है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें या स्थानीय आपातकालीन कक्ष में जाएं।

चालीसवें हफ्ते को माना जाता है गर्भावस्‍था का अंतिम हफ्ता

गर्भावस्था के आखिरी सप्ताह को 40वां हफ्ता माना जाता है जिसे गर्भावस्था का अंतिम दौर भी कहा जाता है। कहा जाता है जो गर्भवती गर्भावस्था के दौरान सबसे अधिक मूवमेंट करती हैं उन्हें डिलीवरी के दौरान कम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं गर्भावस्था 40 वें हफ्ते के बारे में।



गर्भावस्था आमतौर पर 40 हफ्तों तक चलती है यानी 9 महीनें या 40 हफ्तों को एक ही पीरियड कहा जाता है। इन नौ महीनों को कई गर्भवती स्ञियां आराम से पार कर लेती हैं तो कई पूरे नौ महीने तक इसकी पीड़ा में रहती हैं जबकि कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बीच-बीच में तकलीफ होने लगती है।


40वें सप्‍ताह के दौरान गर्भवती स्त्री बहुत ज्यादा थकान महसूस करने लगती है। उसे हर समय लेबर पेन होने का भय महसूस होता रहता है। अपनी भावनाओं को छुपाने की कोशिश करते हुए उसे अकेलापन महसूस होने लगता है।

गर्भवती महिलाएं शरीर में तेजी से बदलाव महसूस करने लगती हैं।

हालांकि डिलीवरी का समय 40 सप्ताह के कुछ दिनों के बाद का दिया जाता है लेकिन गर्भवती स्ञी ऐसे समय में उत्साहित और बेचैन दोनों ही रहती है।

हालांकि 40वें सप्‍ताह में होने वाला बच्चा 7 से 8 पाउंड का रहता है और 20-21 इंच का ही होता है लेकिन बढ़ते भ्रूण में लगातार बदलाव आते रहते हैं और उसके साइज और वजन में भी फर्क आ जाता है।

आमतौर पर होने वाले बच्चे का वजन और स्वास्थ्‍य मां के खान-पान पर ही निर्भर करता है यदि गर्भवती महिला ने खान-पान में कोई कोताही नहीं बरती है तो बच्चा भी तंदरूस्त पैदा होता है।

40वें हफ्ते के दौरान यदि लेबर पेन शुरू हो जाएं तो घबराने की बात नहीं होती क्योंकि 40 से 42 हफ्ते के बीच शिशु कभी भी इस दुनिया में कदम रख सकता है।

40वें सप्‍ताह में गर्भाश्य में बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होते ही बच्चे के बाहर आने की स्थिति आ जाती है।

गर्भावस्था के 40वें हफ्ते में बच्चे के बाल, पलकें, आंखें साफ दिखाई देने लगती हैं।

यदि 40वें हफ्ते के बाद भी लेबर पेन शुरू नहीं होते तो गर्भवती महिला को तनावग्रस्त होने की आवश्यकता नहीं हैं वरना तनाव जच्चा-बच्चा के लिए हानिकारक हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को संक्रमण का खतरा अधिक होता है। जिसके कारण उन्हें कमजोरी हो सकती है। इसलिए आपने आसपास का वातावरण साफ और स्वच्छ रखें। और अपनी गर्भावस्था का आनंद उठाएं। गर्भावस्था में अपने और अपने होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के खातिर अपनी अच्छी तरह से देखभाल करें।

रिश्‍तेदारों को खुशखबरी देने का सही समय है बारहवां हफ्ता

गर्भावस्था का बारहवां हफ्ता यानी आप दूसरी तिमाही में प्रवेश करने वाली है। अब आपको गर्भपात का जोखिम न के बराबर है। यदि आपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों को यह खुशखबरी नहीं दी है तो अब आप उन्‍हें यह खबर दे सकती हैं।




दूसरी तिमाही में प्रवेश करने पर महिलाएं राहत महसूस करती हैं। अब उन्‍हें जल्‍द ही मां बनने का अहसास मन ही मन खुशी देता है। इस समय कुछ महिलाओं का बेबी बंप दिखाई देने लगता है, जब‍िकि कुछ का दिखाई भी नहीं देता। यदि आपके अंदर कोई शारीरिक बदलाव नहीं हो रहा तो परेशानी होने की काई बात नहीं है। आंतरिक परिवर्तन लगातार जारी हैं। इस लेख के जरिए हम आपको देते हैं गर्भावस्‍था के बारहवें हफ्ते के बारे में जानकारी।

गर्भावस्था के बारहवें हफ्ते में
पहली तिमाही के मुकाबले आपको कम थकान महूसस होना और मितली भी कम आना। इस समय आप कोशिश करें कि तनाव न लें। इससे आपके ऊर्जा स्‍तर में वृद्घि होगी।

अब आप एरोबिक्स एक्‍सरसाइज को अपनी दिनचर्या में लागू कर सकती हैं। इसके लिए यह सही समय है।

अपनी दिनचर्या में हल्‍की एक्‍सरसाइज को शामिल करें, इससे आप व गर्भस्‍थ शिशु दोनों ही स्‍वस्‍थ रहेंगे।

बच्चे विकास
आपने दूसरी तिमाही में प्रवेश कर लिया है, अब बच्‍चे के विकास में तेजी आएगी। मस्तिष्क हार्मोन का उत्पादन शुरू करेगा और तंत्रिका कोशिकाएं भी जल्द बढ़ेंगी। गर्भ में पल रहा शिशु तरल पदार्थ को चूसना और आहार को निगलना शुरू कर देगा। सब कुछ सही रहने पर शिशु की लंबाई और आकार में परिवर्तन होता रहेगा।

बच्‍चे की मुठ्ठी ,खोलने और बंद करने की प्रक्रिया भी अब शुरू होने लगी है। समय समय पर बच्‍चे के होठ और भौंहे सिकुड़ने लगी हैं। आंखें और कान चेहने के अनुपात में विकसित होने शुरू हो गए हैं। हफ्तों और महीनों का समय बीतने के साथ शिशु की बनावट में और भी बदलाव आएगा।

आपके शरीर में परिवर्तन
गर्भावस्था के बारहवें सप्‍ताह के दौरान बच्चे की स्थिति में होने वाले परिवर्तन के कारण गर्भाश्‍य के आकार में भी परिवर्तन दिखाई देगा। अब मां का पेट पहले से बड़ा देना शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही आपके वजन में दो से तीन पाउंड की वृद्धि हो जाएगी। त्वचा के रंग में भी कुछ परिवर्तन होगा। यदि आपकी त्वचा पर दाग हैं तो ये गर्भावस्था के दौरान और गहरे हो सकते हैं।

कुछ महिलाओं में पेट के केंद्र से एक गहरे रंग का रेशा दिखाई देना शुरू हो सकता है, यह शिशु के जन्म के बाद गायब भी हो सकता है। हर महिला के गर्भावस्‍था के दौरान अलग-अलग लक्षण होते हैं, इसलिए यदि आपके लक्षण किसी से भिन्‍न हैं तो चिंता की बा नहीं है। गर्भावस्था के बारहवें सप्‍ताह में आपको दिल में जलन भी अधिक हो सकती है। इसमें कमी लाने के लिए दिन भर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में आहार लें।

चिकित्सक से ऐसे खाद्य पदार्थ के बारे में जानकारी करें, जिनके सेवन से दिल में जलन न हो। यह समय मोलर गर्भावस्था का हो सकता है। इस समय नाल ठीक से विकसित नहीं होती। आपको धब्बे या योनि से खून बहता दिखाई दे सकता है। इस तरह की परेशानी होने पर बिना किसी लापरवाही के चिकित्‍सक से परामर्श करें। इस तरह की परेशानी गर्भपात का कारण भी बन सकती है।

क्या उम्मीद की जाती है
दूसरी तिमाही में जाने पर गर्भपात का जोखिम काफी कम हो गया है। सुबह को होने वाली परेशानी, थकान और मितली जैसी दिक्‍कतें भी कम होंगी। आप आप पहले से अच्‍छा महसूस कर रही हैं। आपके हार्मोन बच्चे के विकास के साथ समायोजन कर रहे हैं और सब अच्छी तरह से चल रहा होना चाहिए। आपको त्वचा सूर्य के प्रकाश के प्रति अतिसंवेदनशील बनी महसूस हो सकती है।

इस समय त्वचा पर दाग या काले धब्बे बन सकते हैं। धूप में जाने से पहले सनस्क्रीन का इस्‍तेमाल फायदेमंद रहेगा। संतुलित आहार योजन को अपनी दिनचर्या का हिस्‍सा बनाएं रखें। जो महिलाएं पहले गर्भवती रह चुकी हैं, उनसे बात करें और उनके अनुभवों को जानने की कोशिश करें। अपने आैर बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य की निगरानी के लिए समय-समय पर चिकित्‍सक से मिलते रहें।

सुझाव / सलाह
आपने सफलता पूर्वक पहली तिमाही पूरी कर ली है। अब आपकी दूसरी तिमाही की शुरूआत हो चुकी है। पहले के मुकाबले आप शारीरिक व मानसिक रूप से बेहतर महसूस कर रही हैं। यदि आने वाले दिनों में आपका यात्रा करने का विचार बन रहा है तो उसके लिए यह समय बेहतर है। सुबह को होने वाली परेशानी से भी आपको राहत मिलेगी। दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों से मिलने वाली बधाईयां आपकी खुशी को दोगुना कर देंगी।

अन्य महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान की बातों को सुनकर उनसे अपने अनुभवों की तुलना न करें। जरूरी नहीं कि हर महिला की गर्भावस्‍था के दौरान का अनुभव एक जैसा ही हो। यदि इस सबके बाद आपके मन में अगर कोई प्रश्‍न है तो चिकित्सक से परामर्श करना अच्‍छा रहेगा।

सामान्य गर्भावस्था से अलग होते हैं जुड़वां गर्भावस्था के लक्षण

गर्भवती महिला के एक ही गर्भावस्था के दौरान पैदा होने वाले दो बच्चों को जुड़वा कहते हैं। आमतौर पर जुड़वा या तो एक जैसे हो सकते हैं या फिर भिन्न-भिन्न प्रकृति के भी हो सकते हैं क्योंकि वे दो अलग अलग अंडो में दो भिन्न-भिन्न शुक्राणुओं द्वारा निषेचित होते हैं। आइये विस्तार से जाने कि क्या हैं जुड़़वा बच्चों के शुरूआती लक्षण।



जुड़वां गर्भधारण सामान्य गर्भधारण से काफी अलग हैं। जुडवां गर्भधारण में समय से पहले डिलिवरी और जन्म के समय बच्चे के वजन कम होने की अधिक संभावना होती है। । आइए जानें कि जुड़वा बच्चों की गर्भवती के शुरूआती लक्षण क्या-क्या है।

जुड़वा बच्चों के शुरूआती लक्षण

मॉर्निग सिक्नेस 
जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती महिला के प्रारंभिक लक्षण में मॉर्निग सिक्नेस बहुत ज्यादा होती है। पचास प्रतिशत से अधिक महिलाएं अपनी गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही मतली और जी मिचलाना का अनुभव शुरू कर देती हैं। महिला जिनके जुड़वा बच्चे होने वाले है अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में मॉर्निग सिक्नेस का अनुभव अधिक करती है।

ब्लीडिंग और स्पोटिंग 
एक महिला जो जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती है उसको स्पोटिंग और ब्लीडिंग होने की संभावना अधिक होती है। अगर आप गुलाबी और भूरे रंग के धब्बे नोटिस करते है तो यह अत्यंत सामान्य बात है। यदि आपके ब्लीडिंग हो रही है और साथ में बुखार और लाल खून के धब्बे नहीं है तो डरने की कोई बात नही हैं।

वजन
जुड़वां गर्भावस्था में वजन सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक होता है क्योंकि आपके दो बच्चे, दो प्लासन्टा और अधिक एमनियोटिक द्रव के साथ होते है। एक औसत गर्भावस्था में सामान्य वजन 25 पाउंड होता है जबकि जुड़वां गर्भावस्था में यह 30 से 35 पाउंड के बीच हो सकता हैं।

दो दिल 
बच्चे के दिल की धड़कन पहली बार सुनना हर माता पिता के लिए सबसे यादगार अनुभव होता है। बच्चे के जन्म से पहले आप डॉपलर प्रणाली के माध्यम से अपने बच्चे के दिल की धड़कन सुन सकते हैं। गर्भावस्था के नौवें सप्ताह से जुड़वा बच्चों के दिल की धड़कन अलग-अलग से सुनी जा सकती है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है क्योंकि इनकी पहचान को कभी-कभी अलग नहीं किया जा सकता है।

जल्दी डिलिवरी और सिजेरियन
जुड़वां गर्भावस्था के साथ महिलाओं में समय से पहले डिलिवरी होने की अधिक संभावना होती है। लेबर पेन गर्भावस्था के 36 या 37 सप्ताह के बीच में हो सकते है। इस के अलावा, जुड़वां गर्भावस्था में बच्चे ज्यादातर ब्रीच स्थिति में होते है जिस कारण डिलिवरी नॉर्मल की जगह सिजेरियन होने की संभावना बढ़ जाती है।

जुड़वां गर्भावस्था की संभावना
30 और 40 वर्ष में महिलाओं को जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती होने की संभावना अधिक होती हैं। इसका कारण यह है जैसे आप बड़े होते है ओवुलटरी चक्र में संघनता कम हो जाती है। इस स्तर पर अधिक संभावना होती है एक ही समय में दो बच्चों की। जुड़वा गर्भावस्था और सामान्य गर्भावस्था में बहुत अधिक अंतर नहीं होता, लेकिन जुड़वा गर्भावस्था में वजन और थकान अधिक बढ़ने लगती है। गर्भावस्था के सामान्य लक्षण रहते हुए भी जुड़वा गर्भावस्था में जोखिम कई बार बढ़ जाते हैं। बहरहाल, गर्भावस्था कैसी भी हो देखभाल और सावधानी बेहद जरूरी है।

हमेशा भूख लगना 
जुड़वां गर्भावस्था के लक्षणों में से सबसे बड़ा लक्षण यह है कि आपको हमेशा भूख लगेगी। जुड़वां गर्भावस्था में महिला को सामान्य गर्भावस्था में महिला की तुलना में अधिक खाने की जरूरत महसूस होती है। यदि आप भी जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती हैं तो आपको भी लगातार भूख लगेगी।

गर्भपात से बचने के लिए इसके संकेतों को समझना है बेहद जरूरी

कोई भी महिला जब गर्भधारण करती है, तो वह यह कल्पना भी नहीं कर सकती कि उसे गर्भपात अर्थात मिसकैरेज जैसी समस्या से गुजरना पड़ सकता है। कई बार लापरवाही या अनजाने में ही गर्भपात हो जाता है तो कई बार कुछ अन्य कारणों से गर्भावस्था क्षति हो जाती है। इस लेख को पढ़ें और गर्भपात के संकेतों के बारे में जानें।


गर्भपात होने के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे, धूम्रपान, शराब पीना या गर्भ निरोधक दवाओं का अधिक सेवन आदि। गर्भपात में महिला के शरीर से कुछ भ्रूण का हिस्सा और शिशु के आसपास का तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है। अधिकतर गर्भपात गर्भावस्था के सोलह हफ्तों में ही हो जाते हैं। कई दफा गर्भपात अंदर ही अंदर हो जाता है और गर्भवती को इसके संकेतों का पता ही नहीं चल पाता। अधिकांश गर्भपात असामान्य क्रोमोसोम की वजह से होते हैं। अर्थात यह कहा जा सकता है कि यह समस्‍या जेनटिक होती है। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, किडनी की समस्‍या यूट्रस में असामान्‍यता होना आदि गर्भपात के लक्षण होते हैं। सर्वाइकल समस्‍या गर्भावस्‍था के दूसरे हफ्ते में अपना हसर दिखा सकती है। किसी एक महिला को कई दफा भी गर्भपात हो सकता है।

गर्भावस्था क्षति यानी भ्रूण की धड़कन पूरी तरह से पनपने से पहले ही गर्भ में रूक जाती है। आमतौर पर गर्भपात 26वें हफ्ते से पहले ही हो जाता है। गर्भपात यदि खुद ही होता है तो उसके कुछ महत्वपूर्ण संकेत पहले से ही मिल जाते हैं। अधिक ब्‍लीडिंग (रक्तश्राव) होना भी गर्भपात का एक संकेत होता है। यदि गर्भावती होने के बाद योनी से खून आता है यै फिर पेट के‍ निचले हिस्‍से में दर्द और पेशाब करते समय दर्द महसूस होता है, तो यह गर्भपात के बड़े संकेत हैं। साथ ही सफेद और गुलाबी रंग का डिसचार्ज, वजन में गिरावट, स्तनों का कठोर होना, मतली आना आदि संकेत इस बात का इशारा करते हैं कि गर्भपात होने वाला है।

गर्भपात के संकेत व लक्षण-
सामान्यतः महत्वपूर्ण संकेतों में योनि से रक्तस्राव होने लगता है या फिर पेट के निचले हिस्से में अचानक बहुत दर्द होने लगता हैं। हालांकि आरंभ में रक्तस्राव बहुत ज्यादा नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे बहुत ज्यादा हो जाता है।

अधूरा गर्भपात तब होता है जब भ्रूण का कोई भाग गर्भ में रह जाता है। गर्भ धारण के तीसरे से चौथे माह के बीच में होने वाला गर्भपात अकसर अपूर्ण रह जाता है। अपूर्ण गर्भपात में रक्तस्राव जारी रहता है और गर्भ में बच गये ऊतकों में संक्रमण की आशंका बनी रहती है, जिससे बुखार और पेटदर्द भी होता है।

कई बार गर्भवती महिला को मलेरिया जैसी कोई बीमारी होने से ,होने वाले बच्चे को खतरा रहता है। लेकिन बीमारी की हालत में यदि महिला पेट के बल गिर पड़ी है, तो ऐसे में गर्भपात की संभावना ज्यादा होती है।

उन महिलाओं को गर्भावस्था क्षति हो सकती है, जो अक्सर बीमार रहती है या फिर पहले उनका गर्भपात हो चुका हो।

भ्रूण की दिल की धड़कनें और मूवमेंट में कमी आना भी मिसकैरेज का सीधा संकेत है।

गर्भपात के संकेतो में कई सामान्य लक्षण भी दिखाई पड़ते हैं जैसे-
  • योनी से भूरे रंग का खून बहना,
  • पेल्विक क्षेत्र में ऐंठन,
  • पीठ के निचले हिस्से और पेट में ऐठन,
  • स्तनों में कठोरता
  • गर्भावस्था के लक्षणों का ना होना या अचानक से बंद हो जाना,
  • योनी से रक्त के थक्कों का आना,
  • गर्भवती स्त्री के कमर में दर्द होना,
  • बच्चे का पेट के नीचे खिसक जाना इत्यादि लक्षण है।

गर्भावस्था क्षति, अपूर्ण गर्भपात से बचने के लिए गर्भावस्था में महिलाओं को अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए। जैसे ही गर्भपात का कोई लक्षण या असामान्य तकलीफ होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जिससे गर्भपात को रोका जा सकें।

इन लक्षणों से जानें गर्भवती हैं आप

मां बनना किसी भी महिला के लिए जीवन के सबसे बड़े उपहार जैसा होता है और इस खबर को सुनने के लिए हर महिला बैताब रहती है। यूं तो गर्भधारण करने पर कुछ लक्षण साफ दिखाई दे जाते हैं लेकिन कई बार कुछ महिलाएं शुरूआती समय में गर्भधारण के लक्षणों को समझ नहीं पाती। जिससे कि स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं के होने का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानें महिलाओं में गर्भधारण के दौरान गर्भावस्था के लक्षणों को।



गर्भावस्था के दौरान सिर्फ महिला ही दूसरा जन्म नहीं लेती बल्कि पुरूष का भी ये दूसरा जन्म माना जाता है। चाहे फिर भ्रूण महिला के भीतर ही क्यों न पल रहा हो। पुरूष का भी जुड़ाव उतना ही माना जाता है। कहा भी जाता है एक महिला तभी संपूर्ण होती है जब वह गर्भधारण करती है।

माहवारी का बंद होना 
स्वस्थ महिला को प्रतिमाह माहवारी निश्चित समय या उसके आसपास होती है लेकिन गर्भधारण करते ही माहवारी आनी बंद हो जाती है। यह गर्भधारण का सबसे पहला लक्षण माना जाता है।

उल्‍टी आना 
अधिकाश: महिलाओं को गर्भावस्‍था के शुरूआती 3 महीनों में सुबह-सुबह मतली आने की समस्‍या सबसे ज्‍यादा होती है। गर्भधारण के प्रारंभिक लक्षणों में जी मिचलाना, उल्टी आना इत्यादि शामिल है। अगर आपको इसमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो समझ लेना चाहिए कि आप गर्भवती है।

सिरदर्द
गर्भावस्था के संकेतों में सिर दर्द भी शामिल हैं। सिर दर्द तो कभी भी हो सकता हे लेकिन हार्मोंस के निरंतर बदलाव के कारण तनाव होने लगता है जिससे कुछ महिलाओं को सिर दर्द की शिकायत होने लगती है।

स्‍तनों में भारीपन
स्‍तनों में गर्भावस्था के दौरान दर्द होने लगता है। हालांकि ये दर्द माहावारी से पहले भी होता है लेकिन गर्भावस्था के दौरान स्तन कोमल भी हो जाते हैं। साथ ही स्‍तनों में भारीपन, उनके आकार में परिवर्तन, निपल्‍स के आसपास के हिस्‍से में ज्‍यादा कालापन आना और स्‍तनों में नसों का फूलना आदि गर्भावस्‍था के लक्षण है।

बहुत अधिक थकान
गर्भधारण करने के पहले हफ्ते से ही बहुत अधिक थकान होना, खासतौर पर सुबह के समय थकान, एक प्रमुख लक्षण है। इस अवस्था में शरीर में प्रोजेस्टोरोन हार्मोन बनता है जिससे शरीर बहुत जल्दी थक जाता है।

बार-बार यूरीन आना
गर्भावस्‍था के शुरूआती दिनों में यूरीन बार-बार आता है क्‍योंकि इस दौरान आपका शरीर अतिरिक्‍त तरल पदार्थ उत्‍पादित करता है जिससे मूत्राशय पर दबाव पड़ता है और आपको बार-बार यूरीन के लिए जाना पड़ता है।

गर्भावस्था सुझाव में डॉक्टर नियमित जांच कराने, पौष्टिक आहार लेने, खूब पानी पीने, फल-जूस इत्यादि के सेवन के साथ ही प्रतिदिन व्यायाम की सलाह भी देते हैं। इन लक्षणों का ध्यान रख आप आसानी से पता कर सकती हैं की आप मां बनने वाली हैं। लेकिन फिर भी डॉक्टर से एक बार जांच व रक्त परिक्षण करा लेना ठीक रहता है। इससे आपको भी पूरी तरह संतुष्टी हो जाती है और मन में कोई शंका नहीं रहती।

गर्भावस्‍था का पता लगाने के लिए कर सकते हैं मिडस्ट्रीम प्रेगनेंसी टेस्ट

घर में हीं प्रेंगनेंसी टेस्ट करने के लिए मिडस्ट्रीम प्रेगनेंसी टेस्ट एक सुविधाजनक व आसन तरीका है। अगर आपके मासिक धर्म में 8-10 दिन की देरी हो रही है और आपको लगता है कि कहीं आप प्रेंगनेट तो नहीं, तो ऐसी हालत में आप यूरीन टेस्ट के जरिए अपनी शंका को दूर सकती है और पता लगा सकती हैं कि आप प्रेंगनेट हैं या नहीं।


मिडस्ट्रीम प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है, इसे आप घर पर ही कर सकती हैं। इसमें यूरीन टेस्ट के जरिए यह पता किया जाता है कि आप प्रेंगनेंट हैं या नहीं। मिडस्ट्रीम प्रेगनेंसी टेस्ट किट आसानी से इस्तेमाल व कहीं भी ले जाई जा सकती है। आइए हम आपको इसके बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

यह कैसे काम करता है
मिडस्ट्रीम जांच यंत्र में मोनोक्लोनल एचसीजी रंग संयुग्म व पॉलीक्लोनल एंटी एचसीजी शामिल होते हैं जो आपमें प्रेंगनेंसी की पहचान करते हैं। किट में जांच करने वाली जगह दोनों ही अभिकर्मकों से कोटेड होती है। जब उसमें उस जगह पर यूरीन की कुछ बूंद डाली जाती है तो कुछ रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिसके कारण रंग परिवर्तित हो जाता है और परिणाम सामने आ जाता है। जांच के लिए यूरीन सैंपल में कम से कम 20 एमएल व एचसीजी हार्मोन की अधिकता होनी चाहिए।

प्रेगनेंसी मिडस्ट्रीम टेस्ट का परिणाम
प्रेगनेंसी टेस्ट यंत्र में परिणाम दिखने के लिए दो लाईनें (कंट्रोल लाईन व टेस्ट लाइन) होती हैं। कंट्रोल लाइन हमेशा परीक्षण के समुचित कार्य को दिखाता है। टेस्ट लाइन तब संकेत करता है कि जब प्रेंगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव होता है। प्रेगनेंसी की पहचान आप घर पर कर सकती है लेकिन इसके बाद गॉइनो कोलाजिस्ट को दिखाना बहुत जरूरी है क्योंकि वही आपकी प्रेंगनेंसी को सुनिश्चत करेगी। साथ ही जब प्रेगनेंसी टेस्ट निगेटिव हो तो जांच वाली जगह पर कोई लाईन नहीं दिखेगी।

यूरीन टेस्ट की सीमा
यूरीन टेस्ट से दिखाए जाने वाले परिणाम पूरी तरह से विश्वास योग्य नहीं होते हैं। प्रेंगनेंसी की पहचान के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

प्रेंगनेंसी के अलवा अन्य कई कारण हैं, जिससे एचसीजी हर्मोन का स्तर ऊंचा हो जाता है जैसे, स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, रोगाणु सेल ट्यूमर व प्रोस्टेट कैंसर। यूरीन में एचसीजी की ज्यादा मात्रा होने से प्रेंगनेंसी का टेस्ट पॉजिटीव हो सकता है।

परीक्षण की संवेदनशीलता से अगर एचसीजी का स्तर नीचे है, तो मिडस्ट्रीम टेस्ट का परिणाम गलत भी हो सकता है इसलिए प्रेंगनेंसी सुनिश्चित करने के लिए पहले टेस्ट के दो दिन बाद फिर टेस्ट करें। यूरीन टेस्ट सुबह-सुबह ही करना चाहिए।

खून की जांच बता देगी गर्भस्थ शिशु का लिंग

लिंग निर्धारण के लिए खून की जांच भरोसेमंद साबि‍त हो सकती है। कई शोधों में यह बात सामने आयी है कि बच्‍चे के लिंग के निर्धारण के लिए रक्‍त के नमूने की जांच काफी है। रक्‍त की जांच करके बच्‍चे के लिंग का निर्धारण किया जा सकता है।






ब्‍लड टेस्‍ट के जरिए सात हफ्ते के गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाया जा सकता है और इससे भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। यह सबसे कम समय में होने वाल टेस्‍ट है, जबकि अल्‍ट्रासाउंड के लिए कम से कम गर्भधारण के बाद 11 हफ्ते का समय गिना जाता है। अल्‍ट्रासाउंड की तुलना में यह ज्‍यादा भरोसेंमद जांच है। आइए हम आपको इसके बारे में विस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं।

क्‍या कहता है शोध 
अमेरिका में हुए एक अध्ययन में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं के खून का डीएनए परीक्षण करने से सात हफ्ते के गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाया जा सकता है और इससे भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। अध्ययन के परिणाम ‘अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ की पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इसमें कहा गया है ‘शिशु के लिंग का पता करने के लिए महिला के रक्त से कोशिका मुक्त भ्रूण, डीएनए का परीक्षण, मूत्र परीक्षण या सोनोग्राम की तुलना में काफी सटीक और गर्भवती महिला की गर्भाशय जांच से अधिक सुरक्षित है।’

गर्भस्थ शिशु का अल्ट्रासाउंड भी 11 से 14 हफ्ते का होने पर ही किया जा सकता है लेकिन रक्त के डीएनए परीक्षण के जरिए सात हफ्ते के गर्भस्थ शिशु का भी लिंग ज्ञात किया जा सकता है। यह डीएनए परीक्षण गर्भवती महिला के गर्भ की जांच करने से अधिक सुरक्षित है। गर्भाशय जांच में भ्रूण के इर्द गिर्द की थैली से तरल पदार्थ लिया जाता है जिसमें कभी- कभार गर्भपात की आशंका रहती है। अध्ययन में कहा गया है ‘भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए भरोसेमंद विकल्प की उपलब्धता से गर्भपात की आशंका कम होगी और इस विधि का उन गर्भवती महिलाओं द्वारा स्वागत किया जाएगा जिन्हें भ्रूण के विकृति युक्त होने का जोखिम रहता है।’

अन्‍य जांच 
गर्भस्‍थ शिशु के लिंग का निर्धारण करने के लिए ब्‍लड टेस्‍ट के अलावा कई अन्‍य तरीके भी हैं। अल्‍ट्रासाउंड, डीएनए का परीक्षण, मूत्र परीक्षण या सोनोग्राम का भी प्रयोग किया जा सकता है। इन सबमें सबसे ज्‍यादा प्रयोग में लाया जाने वाला यंत्र है अल्‍ट्रासाउंड। अल्‍ट्रासाउंड की तकनीके के जरिए लिंग का निर्धारण आसानी से किया जा सकता है। इन जांचों का फायदा भी है। इसके जरिए आप बच्‍चे के विकास और स्‍वास्‍थ्‍य की जानकारी कर सकते हैं। कुछ मामलों में यह सुरक्षित होता है, लेकिन अल्‍ट्रासाउंड के दौरान निकलने वाली किरणें बच्‍चे के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। इसलिए ऐसी जांच कराने से बचना चाहिए।

हालांकि लिंग निर्धारण में पूरी तरह से पिता की भूमिका होती है। पिता के गुणसूत्रों से ही लड़का और लड़की का निर्धारण होता है, महिला में केवल एक्‍स गुणसूत्र होता है जबकि पुरुष में एक्‍स और वाई गुणसूत्र होते हें। यदि एक्‍स-एक्‍स गुणसूत्र मिलें तो लड़का और यदि महिला का एक्‍स और पुरुष का वाई गुणसूत्र मिलें तो लड़की पैदा होती है।

घर पर आसानी से कर सकते हैं गर्भावस्था का परीक्षण

मातृत्व का एहसास ही एक महिला को रोमांचित कर देता है। गर्भवती होने का हल्का सा अंदेशा महिला को यह उसकी पुष्टि करने के लिए उत्सुक कर देता है। लेकिन गर्भवती होने के लक्षण दिखने के साथ ही आप चिकित्सक के पास जा नही सकतीं।

घर पर गर्भावस्था जांच के लिए बाजार में कई प्रकार की गर्भावस्था जांच किट मिलती हैं। जिसका प्रयोग करके आप अपना प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकती हैं। आप गर्भवती हैं इस बात की पुष्टि इस किट के जरिए अगर सुनिश्चिति हो जाता है, तो भी एक बार चिकित्सक के पास जाकर अन्य टेस्ट जरूर करवा लीजिए। आइए हम आपको बताते हैं कि घर पर गर्भावस्था का परीक्षण कैसे करें।


घर पर करें प्रेगनेंसी टेस्ट
प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए किट में यूरीन का सैंपल लिया जाता है। इस जांच से यूरीन में मौजूद ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) का पता लगाया जाता है। यदि आपके यूरीन में एचसीजी हार्मोन पाया जाता है, तो इसका मतलब यह है कि आप गर्भवती हो चुकी हैं। घर पर किया जाने वाला प्रेग्नेंसी टेस्ट हमेशा सुबह उठने के बाद करें। इससे परिणाम के गलत आने की संभावना कम होती है। क्योंकि सुबह-सुबह आपके यूरीन में अन्य तरल पदार्थ मौजूद नहीं होते हैं और सुबह युरीन में एचसीजी हार्मोन का स्तर ज्यादा भी होता है।

टेस्ट निगेटिव हो तो 
कभी-कभी जल्दबाजी में प्रेगनेंसी टेस्ट किट का प्रयोग करने के कारण टेस्ट निगेटिव आ जाता है। ऐसे में ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। आप दोबारा करीब 72 घंटे के बाद फिर टेस्ट कीजिए। समय से पहले टेस्ट किट का प्रयोग करने के कारण जांच का परिणाम निगेटिव आता है। गर्भवती होने के लगभग दस दिन बाद प्रेगनेंसी किट का प्रयोग किया जाए तो परिणाम सटीक होते हैं। कभी-कभी गर्भावस्था जांच किट भी सही परिणाम नहीं दे पाती है जिसके कारण गलत परिणाम निकल सकते हैं।

टेस्ट पॉजिटिव हो तो 
महिला द्वारा घर पर ही गर्भावस्था– जांच किट के प्रयोग के बाद अगर परिणाम सकारात्मक आता है तो उसकी पुष्टि के लिए एक बार डॉक्टार के पास जांच अवश्य करा लीजिए। हालांकि गर्भावस्था के सामान्य लक्षण – उल्टी होना, माहवारी में देरी, पीठ में दर्द होने और किट द्वारा एचसीजी हार्मोन ढूंढ लिए जाने के बाद परिणाम पक्ष में ही आता है।

परीक्षण के फायदे 
किसी महिला को यह एहसास हो जाए कि वह गर्भवती है तो इस बात की पुष्टि होने तक बहुत ही उत्सुक रहती है। ऐसे में गर्भावस्था जांच किट आपकी इस मुश्‍किल को बहुत ही आसानी से हल कर सकता है। इस किट का प्रयोग करके आप घर पर ही गर्भावस्था की पुष्टि कर सकती हैं। इस किट का प्रयोग करके आप डॉक्टर के क्लीनिक तक जाने वाली भागदौड़ से भी बच जाते हैं।


यदि मासिक धर्म नहीं हुआ है और उसके बावजूद प्रेगनेंसी स्ट्रिप में नकारात्माक परिणाम आते हैं, तो आप तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले सकती हैं। उसकी सलाह पर अन्य जरुरी टेस्ट कराएं।

Tuesday, 25 August 2015

अगर पति से की ये बात तो बिखर सकता है परिवार



शादी के बाद दो बिल्कुल अनजान लोगों का जीवन एक हो जाता है. उनके साथ ही उनके परिवार वाले भी एक बंधन से जुड़ जाते हैं. परिवार के सदस्य जहां हमेशा साथ रहकर ताकत देने का काम करते हैं वहीं पति-पत्नी अपनी समझदारी से इस रिश्ते को ताउम्र चलाने की कोशिश करते हैं.

इस दौरान कई बार ऐसी स्थिति भी सामने आती है जब ये लगता है कि अब सबकुछ बिखरने वाला है और रिश्ता टूट जाएगा. पर इन कमजोर पलों में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ना ही इस रिश्ते की नींव है. एक-दूसरे पर भरोसा, प्रेम और समझ पति-पत्नी के रिश्ते के लिए बेहद जरूरी है. दोनों को अपनी हर चीज और हर बात एक-दूसरे के साथ शेयर करनी चाहिए.

पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कुछ ऐसी भी बातें होती हैं जिन्हें किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए. पत्न‍ियां, पतियों से लगभग हर बात बता देती हैं पर यहां कुछ ऐसी ही बातों का जिक्र है जिन्हें भूलकर भी पति से नहीं बताना चाहिए:

1. अपने पूर्व प्रेमी और प्रेम के बारे में
भले ही शादी से पहले आप किसी लड़के से प्यार करती रही हों लेकिन शादी के बाद उसे भूल जाना ही आपके हित में होगा. भले ही आपको लगता हो कि आपके पति खुले विचारों के है और उन पर इस बात का असर नहीं होगा लेकिन आपको बता दें कि ऐसा होना जरूरी नहीं है. हो सकता है कि कभी लड़ाई होने पर वो आपको आपके पूर्व प्रेमी का नाम लेकर ताना दे दे. ये स्थिति बिल्कुल भी सही नहीं होगी.

2. फाइनेंशियल स्टेटस
ये बात खासतौर पर उन महिलाओं के लिए लागू होती है जो वर्किंग हैं. आपके लिए ये बहुत जरूरी है कि आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ अलग-अलग हो. जरूरी नहीं है कि आप अपने पति से अपने हर अकाउंट की डिटेल शेयर करें. वो चाहे जी-मेल अकाउंट हो या फिर बैंक-अकाउंट.

3. चुगली न कर
किसी भी लड़के को अपने परिवार वालों के बारे में सुनना अच्छा नहीं लगता है. ऐसे में अगर आपको उसके परिवार के किसी सदस्य की कोई बात बुरी भी लग जाए तो उसे ठंडे दिमाग से सुलझाने की कोशिश करें. अपने पति से शिकायत करने पहुंच जाना अच्छा नहीं रहेगा. हो सकता है कुछ वक्त तक तो वो आपकी बात सुने लेकिन धीरे-धीरे उसे इससे चिढ़ होने लग जाएगी.

4. पति से भूलकर भी न करें ये जिक्र
भले ही आपके पति अपने दोस्तों पर जान देते हों लेकिन उन्हें ये बिल्कुल भी अच्छा न‍हीं लगेगा कि आप उनके दोस्तों को बहुत अधिक तवज्जों दें.

प्रेग्नेंट होने के लिए अंधेरे में बनाएं संबंध


वैज्ञानिकों ने हाल में हुए एक शोध के आधार पर कहा है कि बहुत अधिक रोशनी गर्भधारण पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है. अगर बेडरूम में बहुत रौशनी है तो इससे महिला की प्रेग्नेंसी पर असर पड़ सकता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि बेडरूम में पर्दे से छनकर आने वाली हर रोशनी, चाहे वो स्ट्रीट लाइट हो या बाहर से गुजरने वाली गाड़ियों की रोशनी, सभी महिला की प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालती हैं.
 
इसमें कंप्यूटर और टैबलेट की रौशनी भी शामिल है. औसत उम्र की महिलाओं पर इसका सबसे बुरा असर होता है.

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ऐसी महिलाएं जो गर्भधारण संबंधी परेशानी से जूझ रही हैं, उनके लिए वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि वे अच्छी नींद लें. गर्भधारण का नींद से बहुत गहरा संबंध है. इसके साथ ही उनका कहना है कि ऐसी महिलाओं को समय से भोजन करना चाहिए और कमरे में रोशनी बिल्कुल हल्की कर देनी चाहिए. हल्की रोशनी में सोना बहुत महत्वपूर्ण है.

हो सकता है कि ये सुझाव आपको थोड़े अटपटे लग रहे हों लेकिन मां-बाप न बन पाने वाला हर सातवें जोड़ें की इस परेशानी का मुख्य कारण अज्ञात है. इसके साथ ही इस तथ्य को इस बात से भी बल मिलता है कि कमरे में बहुत अधिक रोशनी होने से हमारा बॉडी क्लॉक बिगड़ जाता है.


ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता के बीच के संबंध को अनदेखा नहीं किया जा सकता है. इस बात की जांच के लिए अमेरिकी और जापानी शोधकर्ताओं ने चूहों पर कुछ परीक्षण किए.

उन्होंने ये पता करने की कोशिश की कि किस तरह डिस्टर्ब बॉडी क्लॉक प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है. हालांकि इस प्रयोग का युवा चूहों पर तो कोई असर नहीं हुआ लेकिन औसत उम्र वालों के प्रेग्नेंसी रेट पर असर जरूर पड़ा.

करीब 71 प्रतिशत, अधि‍क उम्र होने के बावजूद नॉर्मल बॉडी क्लॉक के साथ प्रेग्नेंट हुईं, जबकि डिस्टर्ब टाइम क्लॉक में ये केवल 10 फीसदी ही रहा.

हालांकि ये शोध चूहों पर ही था लेकिन महिलाओं की प्रजनन क्षमता भी रोशनी की वजह से प्रभावित होती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाओं को रात के समय रोशनी के संपर्क में आने से परहेज करना चाहिए.
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के रिसर्चर डॉक्टर जेन ब्लॉक का कहना है कि आजकल के समाज में महिलाओं को कई ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है.

मांगलिक से शादी करने के साइड इफैक्ट

ज्योतिषशास्त्र के कालपुरुष सिद्धान्त अनुसार लग्न देह है, चंद्रमा मन है, शुक्र रति है, मंगल स्वयं कामदेव हैं, गुरु उच्च शिखर पर ले जाने वाले व सुख प्राप्ति दिलाने वाले हैं। वर के लिए शुक्र पत्नी कारक है कन्या के लिए गुरु पति कारक है। अतः इनकी शुभता व अशुभता का सुगमता से अध्ययन किया जाना आवश्यक है। मंगल अग्नि तत्व प्रधान ग्रह है। मारकेश होने पर मृत्यु कारक है। परंतु मंगल ग्रह साहस, पुरूषार्थ, आत्म बल व उच्च शिखर का कारक भी है। अतः यदि एक व्यक्ति के पूर्ण भावों में मंगल के कोई पाप ग्रह हों तो वह द्विगुण, त्रिगुण मांगलिक हो जाएगा। पाप ग्रह जहां पर जातक को आकस्मिक धन लाभ प्राप्त कराते हैं वहां पर भौतिक सुखों में कमी लाते हैं व दांपत्य में क्लेश का कारण बनते हैं।


बृहत्पाराशरहोरा व भावदीपिका जैसे शास्त्रनुसार जातक या जातिका की जन्मपत्री में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश में मंगल स्थित होने पर मंगलीक दोष होता है। मानसागरी, अगस्त्य संहिता, जातक पारिजात जैसे शास्त्रनुसार लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश मंगल होने पर जन्मकुंडली मंगलीक मानी जाती है अर्थात यदि जन्मपत्री के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश में यदि मंगल विराजमान हो तब कुंडली मंगलीक दोष युक्त मानी जाती है। यदि कुंडली मंगलीक हो तो लग्न से कलह, द्वितीय से कौटुम्बिक कलह, चतुर्थ से दैनिक रोजगार में बाधा, अष्टम से आयु कष्ट, द्वादश से शैया कष्ट होता है क्योंकि मंगल, कलत्र, अग्नि, दुर्घटना व विग्रह का कारक होता है।
 
मांगलिक दोष का मूलार्थ है व्यक्ति की कुंडली में यदि मंगल लग्न में है तब सप्तम भाव पर सप्तम दृष्टि से दुष्प्रभाव पड़ेगा व जीवनसाथी को खतरे की संभावना रहेगी। द्वितीय भाव में मंगल स्थित होने पर जीवनसाथी की आयु को खतरा रहेगा क्योंकि सप्तम से द्वितीय भाव अष्टम अर्थात आयु का होगा। चतुर्थ में मंगल होने पर सप्तम भाव पर चतुर्थ दृष्टि होगी। सप्तम में मंगल होने पर जीवनसाथी को खतरा व मंगल की द्वितीय भाव पर अष्टम दृष्टि पड़ेगी। अष्टम में मंगल होने पर द्वितीय भाव अर्थात् जीवन साथी के आयु भाव पर सप्तम दृष्टि होगी। द्वादश मंगल होने पर सप्तम भाव प्रभावित होगा अर्थात छः भावों में मंगल स्थित होने पर जीवनसाथी पर प्रभाव पड़ने पर मंगलीक दोष माना जाता है।
 
वर-वधू में से यदि किसी की भी कुंडली में चंद्रमा पाप ग्रह से दृष्ट हो या किसी भी ग्रह से अदृष्ट हो। शनि विषम राशिगत हो। मंगल-केतु की युति हो या दृष्टि संबंध हो। सप्तम भाव पीड़ित हो। सप्तमेश पाप ग्रह से दृष्ट हो। शुक्र सिंह राशिगत हो। सप्तम भाव को राहु, केतु, मंगल, शनि व सूर्य देखते हों या सप्तमेश के साथ युति बनाते हों। यदि कुंडली में लग्न व सप्तम भाव से दाईं व बाईं ओर से कालसर्प दोष हो। कुंडली में मांगलिक दोष हो व वज्र, शूल, व्यातिपात, गंड, अतिगंड, व्याघात योग हो। शुक्र पाप राशिगत होकर नवमांश में द्विस्वभाव राशि में हो। सप्तमेश वक्री व पाप कर्तरी योग में हो। तो ऐसी अवस्था में दांपत्य कलह, यौन असंतुष्टि, व संबंध-विच्छेद व विवाह विघटन तक की नौबत आ जाती है।

Monday, 24 August 2015

एडल्ट फिल्म देखने वाले ज्यादातर मर्द होते हैं धोखेबाज


हालिया हुई एक स्टडी में कहा गया है कि एडल्ट फिल्में देखने वाले ज्यादातर पुरुष धोखेबाज होते हैं. उनमें धोखा देने की आदत औरों की तुलना में बहुत अधिक होती है. क्या आपको भी ऐसा लगता है?

आज के समय में अगर कोई आपसे कोई ये कहे कि उसने आज तक एडल्ट फिल्म नहीं देखी है तो उस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. आपके मन में तुरंत ये सवाल कौंध जाता है कि क्या ऐसा संभव है?
हालांकि ये स्टडी केवल पुरुषों के बारे में ही बताती है लेकिन एडल्ट फिल्में देखने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं. 30 से 35 वर्ष की महिलाएं सबसे अधिक एडल्ट फिल्में देखती हैं. एक ओर जहां पुरुषों को लेकर ये आम धारणा बन चुकी है कि वो निश्चित रूप से एडल्ट फिल्में देखते हैं वहीं महिलाएं अब भी ये बात छिपाती हैं.

उनका मानना होता है कि अगर उनके पार्टनर को ये पता चल गया तो वो उन पर भरोसा करना छोड़ देगा. यही बात पुरुषों के संदर्भ में भी है. स्टडी के मुताबिक एडल्ट फिल्में देखने वाले पुरुषों में धोखा देने की आदत प्रबल होती है.

इसी से जुड़ी हुई एक दूसरी स्टडी में कहा गया था कि धोखेबाज पुरुष एक दिन में दो से तीन बार एडल्ट फिल्में देखते हैं.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा के ए मारलिया ग्विन के अनुसार, एडल्ट फिल्में पुरुषों को विकल्प देती हैं. उस एक वक्त में उसे लगता है कि उसके पास विकल्प ही विकल्प हैं. सेक्सोलॉजिस्ट और कंसलटेंट डॉक्टर धनंजय गंभीरे का कहना है कि पोर्न देखने से देखने वाले में हिम्मत आती है. इससे वो धोखा देने के लिए कदम बढ़ाता जाता है. इसकी वजह से उनके व्यवहार में भी काफी बदलाव आ जाते हैं.

ऐसे में एडल्ट फिल्में देखना और धोखा देने के बीच संबंध तो हो सकता है लेकिन सीधे तौर पर नहीं.
इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी मानी जाती है कि पोर्न देखने वालों के लिए अंतरंग संबंध फैंटसी से अधिक कुछ नहीं रह जाता है. ऐसे में रीयल लाइफ से अधिक उन्हें फैंटसी में रहना ही पसंद आता है.

कैसे कम करें एडल्ट फिल्में देखने की लत को?
डॉक्टरों का कहना है कि ये कोई बीमारी नहीं है लेकिन इसकी लत बुरी है. इससे परेशानी हो सकती है. ऐसे में खुद के लिए कुछ नियम बनाने की जरूरत है:

  • खुद पर काबू.एडल्ट फिल्में देखने से खुद को रोकें.
  • इससे जुड़े सभी माध्यमों को हटा दें.
  • अपने खाली वक्त को दूसरे कामों में लगाएं.
  • अगर आप अपनी आदत पर काबू नहीं कर पा रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह लें.

शादी के बाद पहली रात को भूलकर भी न करें ये काम



शादी हो या शादी से जुड़ी दूसरी रस्में. हर रस्म का अपना महत्व होता है. न केवल दूल्हा-दुल्हन के लिए बल्क‍ि उनसे जुड़े हर शख्स के लिए भी शादी किसी पर्व से कम नहीं होती है.

शादी के बाद की पहली रात दूल्हा और दुल्हन दोनों के लिए बहुत खास होती है. इस पहली मुलाकात में दोनों एक-दूसरे को समझने की और जानने की कोशिश करते हैं. दोनों अपने-आप को इस बात के लिए तैयार करते हैं कि उन्हें इस रिश्ते को जीवनभर संभालना है.

ऐसे समय में रोमांच तो भरपूर होता ही है साथ ही झिझक भी कम नहीं होती है. दोनों ही ये चाहते हैं कि वो कुछ भी ऐसा न कर दें जिससे सामने वाले को कुछ बुरा लगे क्योंकि ये वो वक्त होता है जो जिंदगीभर याद रह जाता है.
ऐसे में कोशिश करनी चाहिए आप इनमें से कोई भी गलती न कर बैठें:

1. बहुत ज्यादा की उम्मीद न करें
हर कोई सुहागरात को स्पेशल बनाना चाहता है लेकिन अपने पार्टनर से बहुत अधिक उम्मीद नहीं करनी चाहिए. हो सकता है उसे किसी से घुलने-मिलने में वक्त लगता हो. ऐसे में अपनी उम्मीदों को बहुत अधिक न बढ़ाएं.

2. आप जैसे हैं वैसे ही रहिए
शादी के बाद पहली रात को लेकर तरह-तरह की किताबें बाजार में मौजूद हैं. उन्हें पढ़कर खुद को उसके अनुसार ढालने की जरूरत नहीं है. न ही अपने दोस्तों के कहे अनुसार करने की जरूरत है. आप जैसे हैं उसी तरह रहिए. जीवनभर के साथ की नींव रखने का ये पहला मौका है और इसमें कुछ भी बनावटी नहीं होना चाहिए.

3. उतावला होने की जरूरत नहीं
बहुत अधिक उतावलापन आपका इंप्रेशन खराब कर सकता है. धीरज से काम लें और अपने पार्टनर को भी पूरा स्पेस दें. जितना अधिक हो सके, एक-दूसरे से बात करें और आपसी समझ बनाने की कोशिश करें.

4. अपनी चलाने की कोशिश न करें
ये पल आप दोनों का है. ऐसे में ये ध्यान रखें कि अगर आप सिर्फ अपनी ही चलाते रहेंगे तो आपका पार्टनर असहज महसूस कर सकता है. जो भी बात हो उसमें आप दोनों की सहमति का होना बेहद जरूरी है.

5. कमी निकालने से बचें
ये काम भूलकर भी न करें. अगर आप अपने पार्टनर से संतुष्ट नहीं है या फिर आपको कोई दूसरी शिकायत है तो उसे जाहिर करने का ये सही समय नहीं है. आप इन बातों को कुछ वक्त बाद भी कर सकते हैं. तब तक अाप दोनेां के बीच संबंध मजबूत भी हो जाएंगे और आप दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगेंगे.

अंतरंग संबंधों को टालने के लिए महिलाएं बनाती हैं ये 5 बहाने

एक ओर जहां अंतरंग संबंधों को किसी भी शादीशुदा जीवन की खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है वहीं हर बार ये जरूरी नहीं है कि पति-पत्नी इसके लिए तैयार हों.

कई बार पति अपने काम के दबाव से परेशान होता है तो कई बार पत्नी अपनी निजी उलझनों में फंसी रहती है. वैसे तो अच्छा यही होता है कि पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और उसके अनुसार ही अपना आचरण रखें. पर कई बार ऐसा भी होता है कि पुरुष साथी अपनी महिला साथी की भावनाएं समझ नहीं पाते हैं.
ऐसे में महिलाओं को अक्सर झूठ का सहारा लेना पड़ता है. वे अक्सर अपने साथी से कुछ ऐसे बहाने बनाती हैं जिन्हें सुनने के बाद उनका साथी अपना मन बदल दे. लगभग हर महिला के साथ कभी न कभी ऐसी स्थिति आती ही है पर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर महिलाएं एक जैसे ही बहाने बनाती हैं. क्या आप जानते हैं कि ये बहाने कौन से हैं:


1. बहुत अधिक गर्मी है और हम दोनों ही पसीने से तर-बतर हैं
ये सबसे आसान और कारगर बहाना होता है जो महिलाएं अंतरंग संबंधों को टालने के लिए बनाती हैं. हालांकि ये बहाना केवल गर्मी के मौसम में ही काम करता है लेकिन बावजूद इसके अधिकांश महिलाएं यही बहाना बनाती हैं.

2. मेरे पेट में बहुत दर्द है. लगता है मुझे फूड प्वॉइजनिंग हो गई है
ये सबसे आम बहाना है. ज्यादातर महिलाएं पेट दर्द का बहाना बनाती हैं. ऐसे में फूड प्वॉइजनिंग का बहाना सबसे बेहतरीन होता है. हालांकि पेट दर्द के लिए कई दूसरे कारण भी दिए जाते हैं पर ये सबसे मशहूर है.
 
3. मैंने बहुत ज्यादा पी रखी है और मेरा सिर घूम रहा है
ये भी एक बहुत ही मजेदार लेकिन काम करने वाला बहाना है. इस बहाने को आप जितनी बार चाहें इस्तेमाल कर सकती हैं. सिर घूमने का बहाना सुनकर शायद ही कोई पार्टनर आपको जगने की सलाह दे.

4. तुम दूसरी लड़कियों को बिकनी में देख रहे थे, मेरा मन खराब हो गया है
ये इल्जाम लगाने के साथ ही साथ खुद की बात मनवाने का भी एक नायाब तरीका है. अक्सर महिलाएं ऐसा करती हैं कि अपने पार्टनर पर दूसरी लड़कियों को देखने का आरोप लगाकर उन्हें टाल देती हैं.

5. मेरे पूरे शरीर पर सनबर्न हो रखा है
कई महिलाएं ऐसी होती हैं जो सेक्स को टालने के लिए ये बहाना बनाती हैं. ऐसा कहकर वो अपने पार्टनर को टालती हैं.

क्या कारगर साबित हो पाएगी नई फीमेल वियाग्रा?

बच्चे के जन्म के बाद सेक्स लाइफ में समस्या या फिर उदासीनता आ जाना एक आम बात हो गई है. खासतौर पर मां बनने के बाद महिलाओं में सेक्स लाइफ को लेकर उत्साह घट जाता है. कई बार ये रवैया रिश्तों में टकराव की वजह भी बन जाता है.

दवाइयां बनाने वाली कई कंपनियां सालों से महिलाओं के लिए वियाग्रा बनाने का दावा करती आई हैं लेकिन ये कितनी कामयाब हैं कहना मुश्कि‍ल है. साथ ही इनके साइडइफेक्ट का भी खतरा बना रहता है. अब एक ऐसी पिल का दावा किया जा रहा है जिससे महिलाओं की सेक्स के प्रति उदासीनता को दूर किया जा सकेगा.

फेल रही हैं पुरानी सभी फीमेल वियाग्रा
ऑस्‍ट्रेलिया की करीब डेढ़ हजार ऐसी महिलाओं पर अध्ययन किया गया जो हाल ही में मां बनी है. इनमें से लगभग सभी ने स्वीकारा कि मां बनने के बाद से उनकी सेक्स लाइफ में बदलाव आया है.




इससे पहले बाजार में बिकने वाली पिंक वियाग्रा के माध्यम से कई तरह के वादे किए गए थे लेकिन वक्त के साथ वो सभी दावे खोखले साबित हुए. हालांकि कुछ मामलों में ये कामयाब भी रही लेकिन उसके साथ कई तरह के साइडइफेक्ट भी सामने आए.

एक और दावा
अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने फ्ल‍िबेंसेरिन पिल को अप्रूवल दिया है. ऐडी नाम का ब्रैंड इस पिल को बाजार में बेचेगा. कहा जा रहा है कि इसके इस्‍तेमाल से महिलाओं में सेक्‍स के प्रति आने वाली उदासीनता में कमी अाएगी. उम्मीद है कि अगस्त में फाइनल अप्रूवल मिलने के बाद ये पिल मार्केट में बिकने लगेगी. हालांकि इसके साइडइफेक्ट को लेकर चिंता बनी हुई है. हो सकता है कि इसके इस्तेमाल से नींद न आना और बेहोशी जैसी स्थिति सामने आए.

कैसे काम करेगी ये पिल ?
ये पिल फीमेल जेनेटाइल्स को प्रभावित करने के बजाय महिलाओं के दिमाग पर असर डालेगी. दिमाग पर असर डालने वाली ये पिल उन्हें फीलगुड का एहसास कराएगी. फीलगुड उन्हें आगे भी इस एक्सपीरियंस को बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा.

सेक्स लाइफ पर क्यों पड़ता है असर ?
बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं की सेक्स लाइफ पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है. बच्चा पैदा होने के बाद उनकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और तनाव की स्थि‍ति भी पैदा हो जाती है. ऐसे में सेक्स के प्रति उनका रुझान खत्म हो जाता है और वे इसके बारे में सोचना बंद कर देती हैं.

ये नई पिल उनकी इस सोच पर ही प्रभाव डालती है. मार्केट में मौजूद दूसरी कंपनियां भी इसी सोच के आधार पर पिल बनाने की तैयारी कर रही हैं. हालांकि कुछ काउंसलर्स की मानें तो माहौल अच्छा मिलने और पार्टनर के सहायक होने पर इस तरह की स्थि‍ति पैदा होने से रोका जा सकता है.